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राजकीय पॉलिटेक्निक पिपली धनारी में आपदा प्रबंधन कार्यशाला: छात्रों ने सीखे जीवन रक्षक सीपीआर के गुर

राजकीय पॉलिटेक्निक पिपली धनारी में आपदा प्रबंधन कार्यशाला: छात्रों ने सीखे जीवन रक्षक सीपीआर के गुर

उत्तरकाशी- राजकीय पॉलिटेक्निक पिपली धनारी में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DDR) क्लब के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आपदा प्रबंधन, जोखिम कम करने के उपाय, सतत विकास तथा जीवन रक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता पैदा करना था।

कार्यशाला में इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी मैनेजिंग कमेटी उत्तराखंड के सदस्य डॉ. शंभू प्रसाद नौटियाल ने विद्यार्थियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि सीपीआर एक महत्वपूर्ण जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार तकनीक है, जिसका उपयोग कार्डियक अरेस्ट या सांस रुकने की स्थिति में किया जाता है। यह प्रक्रिया मस्तिष्क और अन्य अंगों तक रक्त संचार को बनाए रखने में सहायक होती है, जिससे चिकित्सा सहायता आने तक पीड़ित के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

डॉ. नौटियाल ने कहा कि जब हृदय धड़कना बंद कर देता है, तो मस्तिष्क की कोशिकाएं कुछ ही मिनटों में क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। ऐसे में सीपीआर ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बनाए रखकर जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने सीपीआर की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि पीड़ित बेहोश है या नहीं तथा वह सांस ले रहा है या नहीं। इसके बाद तुरंत 108 या स्थानीय आपातकालीन सेवा को सूचना देनी चाहिए। छाती के बीच में 100–120 बार प्रति मिनट की गति से 30 बार दबाव (Chest Compressions) देना चाहिए, तत्पश्चात 2 बार कृत्रिम सांस देनी चाहिए (30:2 अनुपात)। यह प्रक्रिया तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक एम्बुलेंस न पहुंच जाए या पीड़ित में जीवन के संकेत न दिखें।

कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों ने सीपीआर का अभ्यास किया और आपदा के समय सजग एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लिया। समन्वयक स्मारिका शाह खाती ने सभी प्रतिभागियों को आपात परिस्थितियों में तत्परता से कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर सीनियर प्रवक्ता गिरीश कंसवाल साहित अन्य शिक्षक व कार्यालय कर्मचारी मौजूद थे।

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