गंगा नदी के जल प्रवाह पर दिखा बदलाव, भविष्य में लाखों लोगों के जीवन पर पड़ सकता गंभीर असर
गंगा नदी के जल प्रवाह पर दिखा बदलाव, भविष्य में लाखों लोगों के जीवन पर पड़ सकता गंभीर असर
उत्तरकाशी(वीरेंद्र सिंह नेगी)- कुछ दशकों में गंगा नदी का जल प्रवाह पर बदलाव देखने को मिला, जिससे लाखों लोगों के जीवन पर भविष्य में गंभीर असर देखने को मिल सकता है।
गंगा विश्व धरोहर मंच के संयोजक डॉ शम्भू प्रसाद नौटियाल ने बताया कि हाल के दशकों में गंगा नदी का जल प्रवाह अभूतपूर्व रूप से सूखा है, जोकि लाखों लोगों के जीवन पर गंभीर असर डाल सकता है। डॉ शम्भु प्रसाद ने कहा हाल ही में राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की पत्रिका ‘प्रोसीडिंग्स’ में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि जलधारा सूखने की जैसी प्रवृत्ति 1991 से 2020 के बीच देखने को मिली, वैसी पिछली वर्षो से पहले देखने को नहीं मिली। जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। मानव शरीर पंचतत्त्वों से बना है, पंचतत्वों में जीवन के विकास के लिए जल एक अनिवार्य तत्व है इसलिए ऋषि-मुनियों ने जल की पवित्रता और संरक्षण को अनादिकाल से महत्वपूर्ण माना।
इसी परंपरा का वृहद रूप है गंगा और गंगाजल। गंगा भारत की संस्कृति है। गंगा मात्र नदी ही नहीं, एक संस्कृति है क्योंकि भारत की संस्कृति नदियों के किनारे ही विकसित हुई। गंगा नदी भारत के विचार, व्यवहार, धर्म-कर्म और परंपरा में हमेशा प्रवाहित होती रहती है। गंगा का प्रवाह वह जीवनधारा है, जो सदा बहने यानि जीवन में कर्म करते रहने, परोपकार और पवित्रता की भावना पैदा करती है।
धार्मिक दृष्टि से भी गंगा कामनाओं को पूर्ण करने वाली, पापों को हरने वाली, मंगलकरणी, सुख, समृद्धि, शांति देने वाली मानी गई है। पवित्र गंगा उत्तराखंड के गंगोत्री में गोमुख से निकलकर देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, वाराणसी, प्रयाग और अंत में गंगासागर में मिल जाती है। गंगा के प्रसिद्ध आस्था रखने वाले श्रद्धालु पवित्र गंगाजल को अपने साथ लेकर अनेक धार्मिक कार्यों में इस जल का उपयोग करते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों में सामने आया है कि हिंद महासागर में तेजी से गर्मी बढ़ रही है। हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा में वृद्धि होने की संभावना है, लेकिन हिंद महासागर में तेजी से बढ़ रही गर्मी और उपमहाद्वीप में घटती गर्मी के कारण उत्तर भारत में मानसून कमजोर हो गया है। कम वर्षा के कारण भूजल स्तर बढ़ नहीं पा रहा है। आशंका है कि गंगा जल प्रवाह की स्थिति गंभीर हो सकती है। साथ ही सिंचाई के स्रोतों में कमी के कारण गंगा जल प्रवाह की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। पिछले अध्ययनों में यह बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की स्थिति जारी रहने पर गंगा घाटी में जल प्रवाह में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में तापमान में वृद्धि के कारण पानी की उपलब्धता का अनुमान लगाना जटिल हो सकता है।
