उत्तराखंड

पहाड़ों की पारम्परिक खेती को पुनः उत्पादकों में मोटे अनाज को बढ़ावा देने को लेकर राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में कार्यशाला का आयोजन   

पहाड़ों की पारम्परिक खेती को पुनः उत्पादकों में मोटे अनाज को बढ़ावा देने को लेकर राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में कार्यशाला का आयोजन   

नैनबाग (शिवांश कुंवर)-  पहाड़ों की पारम्परिक खेती को पुनः उत्पादकों में मोटे अनाज को बढ़ावा देने को लेकर राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में कार्यशाला का आयोजन किया गया।  महाविद्यालय  नैनबाग में  मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत एक दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बीज बचाओ आंदोलन के संयोजक विजय जड़धारी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
जिसमें कोंदा (महुवा ) झोगेरा, कौणी, चींणा को पुनः उत्पादन को बढ़ावा देने पर सरकार द्वारा कार्यशाला के माध्यम से किसानों में जन जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यशाला में विजय जड़धारी ने कहा कि पहले पहाड़ मिश्रित खेती होती थी, जिससे लोग स्वस्थ व तंदुरुस्त होते थे। आज लोगों हाई ब्रिट बीज के साथ कई कीटनाशक आने से कई बीमारी आई स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव पडा है।
उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में ग्रामीण को चाहिए वे पुनः पौराणिक व पुश्तैनी खेती के लिए सरकार भी हर प्रयास करने जुट गई है। जिसमे सही दिशा में भारत सरकार ने भी मोटे अनाज को पौष्टिक अनाज का नाम दिया है।
जिस पर जड़धारी ने ग्रामीणों काश्तकारों से प्राकृतिक खेतों में से कोंदा (महुवा ) झोगेरा, कौणी, चींणा को पुनः उत्पादन  में आगे बढ़ने की अपील की है।
वही कालेंज में पूर्ण संसाधन होने के बावजूद भी कार्यशाला में काश्तकार व छात्र छात्राओं को बैठने  की जगह न होने पर खडें होने को मजबूर के चलते छात्र/ छात्राएं कार्यशाला से बाहर होने पर काश्तकारों ने भारी रोष व्यक्त किया ।
इस मौके पर उद्यान पंडित कुन्दन सिंह पंवार,काश्तकार  कुंवर सिह भंडारी, सोबत सिंह कैन्तुरा,युद्धवीर सिंह रावत, रमेश भंडारी, दिनेश तोमर,अर्जून सिंह कुंवर, सुनीता देवी, गोविन्द रप्तार, नरेश सिंह,नीलम, शिवानी, आदि उपस्थित थे।

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