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चुनौतियाँ अभी बाकी हैं……… चार साल का धामी मॉडल: सख़्ती, सादगी और सिस्टम पर पकड़ 

चुनौतियाँ अभी बाकी हैं……… चार साल का धामी मॉडल: सख़्ती, सादगी और सिस्टम पर पकड़ 

 

देहरादून(हरिशंकर सिंह)- उत्तराखंड में सत्ता के गलियारों में एक बात अब साफ़ सुनाई देती है— “धामी मतलब सिस्टम में सख़्ती, चेहरे पर सादगी और चुनौतियों पर मुस्कान।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर लिए हैं। विरोधी कुछ भी कहें, लेकिन समर्थक और तटस्थ लोग भी मानते हैं कि इन चार सालों में उत्तराखंड ने सख्त क़ानून, बेहतर प्रशासन और धरातल पर दिखने वाले बदलावों की शक्ल में कई बड़े फैसलों को देखा है।

नकल माफ़िया पर ताले, दंगाइयों पर लगाम

धामी सरकार ने सबसे बड़ा संदेश तब दिया जब राज्य में नकल विरोधी क़ानून लागू हुआ। वर्षों से परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक से त्रस्त युवा वर्ग ने इसे राहत की सांस के रूप में देखा। दूसरी तरफ़ दंगारोधी क़ानून ने यह जताया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों की अब खैर नहीं।

भू-क़ानून और अतिक्रमण मुक्त अभियान 

उत्तराखंड में भूमि विवाद और बाहरी दबाव की चर्चाओं के बीच भू-क़ानून लागू कर धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया। साथ ही सरकारी ज़मीनों पर वर्षों से चला आ रहा अतिक्रमण हटाना न सिर्फ़ प्रशासनिक हिम्मत दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सरकार ‘राज्यहित’ पर किसी की नहीं सुनती।

आपदा प्रबंधन में सुधार और सतर्क मुख्यमंत्री 

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए धामी सरकार ने आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता दी। चाहे केदारनाथ हो या जोशीमठ की घटना, हर आपदा में मुख्यमंत्री को ग्राउंड ज़ीरो पर देखा गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि धामी की सतर्कता के चलते जान-माल की क्षति पहले के मुक़ाबले कम हुई।

समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून 

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) को कानूनी शक्ल दी। वहीं जबरन धर्मांतरण पर सख्ती लाकर धार्मिक असंतुलन को रोकने का प्रयास किया गया।

 

कनेक्टिविटी और नौकरियों में बढ़त 

राज्य में सड़कों, रेल, एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड स्तर पर काम हुआ। युवाओं को सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती के ज़रिए 23,000 से अधिक अवसर मिले।

महिलाओं को आरक्षण और सीएम का सरल व्यवहार 

धामी सरकार ने महिलाओं को 30% क्षैतिज आरक्षण देकर सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम बढ़ाया। आम आदमी हो या अधिकारी, मुख्यमंत्री का हर किसी के प्रति सरल और एक जैसा व्यवहार, सत्ता की चमक-धमक से परे एक नई छवि बनाता है।

भ्रष्टाचार पर चोट, बेलगाम अफसरों पर नकेल 

इन चार सालों में कई भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हुई। ‘मगरमच्छ जैसे भ्रष्टाचारी सलाखों के पीछे गए’ — ये बात केवल भाषणों तक नहीं रही, बल्कि कई बड़े चेहरों पर कार्रवाई देखी गई। नौकरशाही की कार्यशैली में सुधार हुआ, हालाँकि यह भी माना जा रहा है कि कुछ अफसर अब भी बेलगाम हैं, जिन पर सरकार की निगाह बनी हुई है।

जनता दरबार से कोई खाली नहीं लौटा 

मुख्यमंत्री जनता दरबार केवल औपचारिकता नहीं रहा। ज़रूरतमंदों की सीधी पहुँच और समाधान की कोशिश ने सरकार के प्रति विश्वास को मज़बूत किया।

राजनीतिक संतुलन और पार्टी में तालमेल 

धामी ने न सिर्फ़ सरकार बल्कि पार्टी संगठन के साथ तालमेल रखा। भाजपा के विधायक और मंत्री उनके व्यवहार और कार्यशैली से संतुष्ट दिखे। अक्सर यह देखा गया कि विधायक बिना किसी खींचतान के अपने क्षेत्र के विकास कार्यों की फाइल लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करते हैं और जल्दी मंज़ूरी भी मिलती है।

चुनौतियां बाकी हैं, लेकिन नेतृत्व पर भरोसा कायम 

यह भी सच है कि राज्य के कुछ मंत्रियों के कामकाज ने जनता को निराश किया है। विपक्ष ने सरकार को कई बार कटघरे में खड़ा किया। लेकिन इन सबके बीच मुख्यमंत्री का धैर्य, मुस्कान और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ज़मीन पर सक्रियता, उन्हें एक ‘फाइटर’ मुख्यमंत्री की पहचान देती है।

आखिर में…
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील, सीमावर्ती और पर्यटन-प्रधान राज्य में नेतृत्व की शैली ही सबसे बड़ा संदेश होती है। धामी सरकार ने सख्ती और संवेदनशीलता का जो मिश्रण दिखाया है, उसने न सिर्फ़ जनता बल्कि प्रशासन, संगठन और राजनीतिक गलियारों में भी भरोसे का माहौल बनाया है।

अब आगे की राह में जनता की अपेक्षाएं और बढ़ेंगी। लेकिन फिलहाल मुख्यमंत्री धामी चार साल पूरे कर, एक स्थिर, सशक्त और सरल नेतृत्व की छवि के साथ जनता और पार्टी के भरोसे की कसौटी पर खरे उतरते दिख रहे हैं।

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