उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए मुखवा गांव, धूमधाम से मनाया जा रहा हारदूध मेला
उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए मुखवा गांव, धूमधाम से मनाया जा रहा हारदूध मेला
उत्तरकाशी(वीरेंद्र सिंह नेगी)- उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए मुखवा गांव में प्रतिवर्ष 20 गते सावन को पारंपरिक हारदूध मेला अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पावन मेला मां गंगा के शीतकालीन स्थल मुखवा में गंगा घाटी के आराध्य नाग देवता और सोमेश्वर देवता को समर्पित होता है। मेले में ग्रामीण महिलाएं चार-पाँच दिन पूर्व से अपनी गायों का दूध एकत्र कर लाती हैं, जिससे नाग देवता की विधिपूर्वक पूजा होती है। नाग देवता से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
मंदिर प्रांगण में बने पुष्पों की सुंदर चादर पर जब सोमेश्वर देवता की डोली नृत्य करती है, तो वातावरण भक्ति और आनंद से भर उठता है। डोली के फूलों को श्रद्धालु आशीर्वाद स्वरूप अपने घर ले जाते हैं। रासो-तांदी, ढोल, दमाऊ और रणसिंग की थाप पर समस्त ग्रामीण सामूहिक नृत्य करते हैं।
20 व 21 गते को रासो और पूजा के बाद घरों में पारंपरिक पकवान बनाकर मेले का उत्सव मनाया जाता है। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, अपितु लोक परंपराओं, एकता और आस्था का अद्भुत संगम है, जो पीढ़ियों से गांव की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत बनाए हुए है।
