नैनबाग में ग्राम न्यायालय स्थापित करने की मांग
नैनबाग- नैनबाग क्षेत्र में ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत ग्राम न्यायालय स्थापित करने की जोरदार मांग उठी है। क्षेत्र पंचायत सदस्य बिरोड वार्ड विपिन सिंह पंवार ने सचिव, विधि एवं न्याय विभाग को पत्र लिखकर ग्राम न्यायालय स्थापित किए जाने की मांग की है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य विपिन सिंह पंवार ने पत्र में कहा है कि नैनबाग क्षेत्र, जो लगभग 80-100 गांवों का केंद्र बिंदु है। नैनबाग से जिला मुख्यालय/जिला न्यायालय की दूरी लगभग 130 से 150 किलोमीटर है।ग्रामीणों को न्याय पाने के लिए इतनी लंबी यात्रा करने में न केवल अत्यधिक समय लगता है, बल्कि उन्हें भारी आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं ने इसे ‘न्याय की सुगमता’ के सिद्धांत के विपरीत बताया है। इस मांग का आधार केवल जन-सुविधा नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 क पर भी आधारित है, जो सभी नागरिकों के लिए न्याय को सुलभ बनाने पर जोर देता है। आवेदन में विशेष रूप से ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 का हवाला दिया गया है, जिसे ग्रामीण स्तर पर न्यायालयों की स्थापना कर सामाजिक, आर्थिक या अन्य निःशक्तता के कारण न्याय से वंचित हो रहे नागरिकों को राहत देने के लिए अधिनियमित किया गया था। इसमें भारतीय विधि आयोग की 114वीं रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में वहनीय और त्वरित न्याय की संकल्पना का प्रस्ताव दिया था।
उन्होंने बताया कि नैनबाग में ग्राम न्यायालय की स्थापना होने से नागरिकों को उनके निकटतम स्थान पर न्याय तक पहुंच मिलेगी। न्याय प्रक्रियाओं में त्वरित लाभ मिलेगा। इसके साथ ही न्यायालय पहुंचने के कारण नागरिकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ से छुटकारा मिलेगा।
