उत्तराखंड के ग्रामीण उत्पादों को मिलेगी वैश्विक पहचान: REAP और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न
उत्तराखंड के ग्रामीण उत्पादों को मिलेगी वैश्विक पहचान: REAP और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला संपन्न
देहरादून- ग्रामीण उद्यम वेग परियोजना (REAP) एवं हाउस ऑफ हिमालयाज–हिलांस रूपरेखा के अंतर्गत “वैल्यू चेन स्ट्रेंथनिंग, न्यू प्रोडक्ट डेवलपमेंट एवं सप्लाई चेन ऑप्टिमाइजेशन” विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का सफल आयोजन किया।
कार्यशाला का उद्घाटन परियोजना निदेशक झरना कमठान ने किया। उन्होंने सभी जनपदों के प्रयासों की सराहना करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के विकास पर बल दिया, जो आम बाजार से लेकर लक्ज़री ब्रांड तक उपयुक्त हों। अपने संबोधन में उन्होंने गुणवत्ता आश्वासन, निरंतरता, ब्रांडिंग और विस्तार क्षमता को प्रमुख बताया तथा जिला टीमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए प्रेरित किया, साथ ही हिमालयी पहचान को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

कार्यशाला में निदेशक (वित्त) भूपेन्द्र कांडपाल, उप आयुक्त (परियोजना) नरेश कुमार, उप निदेशक (मानव संसाधन एवं प्रशिक्षण) एम.एस. यादव और कंसल्टेंट कैलाश भट्ट ने विचार व्यक्त किए। पीएमयू टीम, एमसीएफ टीम, जिला परियोजना प्रबंधन इकाइयाँ, हिलांस एफपीओ प्रतिनिधि, सीएलएफ सदस्य एवं स्वयं सहायता समूहों ने उत्पाद प्रदर्शन, तकनीकी सत्रों और समूह चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी की, जिससे परामर्श प्रक्रिया सार्थक और परिणामोन्मुख बनी।
पहले दिन जिलों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए और वैल्यू चेन सुदृढ़ीकरण व नए उत्पाद विकास पर चर्चा की। दूसरे दिन उच्च मात्रा में उपलब्ध उत्पादों का मानचित्रण कर अधिशेष की पहचान और बाज़ार संपर्क को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। जैविक उत्पादों के मानचित्र, पीजीएस एवं आईसीएस पद्धतियों को अपनाने पर विशेष सत्र आयोजित हुए, जिससे प्रमाणन, ट्रेसेब्लिटी और गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ावा मिला। साथ ही, जिला स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने हेतु हब और अत्याधुनिक सुविधाओं की स्थापना पर रणनीतिक योजना अभ्यास भी किया गया।
पहले दिन जिलों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए और वैल्यू चेन सुदृढ़ीकरण व नए उत्पाद विकास पर चर्चा की। दूसरे दिन उच्च मात्रा में उपलब्ध उत्पादों का मानचित्रण कर अधिशेष की पहचान और बाज़ार संपर्क को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। जैविक उत्पादों के मानचित्र, पीजीएस एवं आईसीएस पद्धतियों को अपनाने पर विशेष सत्र आयोजित हुए, जिससे प्रमाणन, ट्रेसेब्लिटी और गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ावा मिला। साथ ही, जिला स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने हेतु हब और अत्याधुनिक सुविधाओं की स्थापना पर रणनीतिक योजना अभ्यास भी किया गया।
दूसरे दिन झरना कमठान ने कार्यशाला का अवलोकन किया और दोनों दिनों के निष्कर्षों पर प्रस्तुति प्राप्त की। उन्होंने कार्यशाला की सफलता की सराहना करते हुए सभी टीमों को उच्चतम गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने, आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने और नए व अभिनव उत्पाद विकास पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए।
समापन सत्र में उप निदेशक (मानव संसाधन एवं प्रशिक्षण) ने बाज़ार मांग के अनुरूप आपूर्ति पक्ष को सुदृढ़ करने और फार्म-टू-मार्केट गुणवत्ता बनाए रखने पर व्यावहारिक सुझाव दिए। निदेशक (वित्त) ने अपने समापन संबोधन में प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों के विकास पर बल दिया, जिससे उन्हें अलग पहचान और प्रतिष्ठा मिल सके।
कार्यशाला का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि REAP के अंतर्गत उत्तराखंड के ग्रामीण उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को बेहतर बाज़ार पहुँच, मूल्य संवर्धन और आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
