उत्तरकाशीउत्तराखंड

उत्तरकाशी के सौड़-सांकरी गांव में देवगोत मेले एवं मैती-धियाणी मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन, श्रद्धा और उल्लास के साथ उमड़ा जनसैलाब

 

सौड़-सांकरी की पावन धरती पर देवगोत मेले का भव्य आयोजन: श्रद्धा और उल्लास के साथ उमड़ा जनसैलाब 

उत्तरकाशी- जनपद उत्तरकाशी के सीमांत विकासखंड मोरी के सौड़-सांकरी गांव की पावन धरती पर देवगोत मेले एवं मैती-धियाणी मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।  लोक देवता सोमेश्वर महादेव के सानिध्य में आयोजित इस लोक उत्सव में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण एवं प्रवासी जन शामिल हुए।

मेले का शुभारंभ विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना और देवडोली के स्वागत के साथ हुआ। मंदिर परिसर में ढोल-दमाऊ की मधुर थाप, रणसिंघा की गूंज और भक्तों की जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान सोमेश्वर महादेव के चरणों में नमन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

 

मैती-धियाणी मिलन बना विशेष आकर्षण

इस अवसर पर आयोजित मैती-धियाणी मिलन कार्यक्रम ने उत्सव को भावनात्मक रंग प्रदान किया। विवाह के बाद ससुराल गई बेटियों (धियाणियों) का मायके पक्ष (मैती) द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। यह आयोजन सामाजिक एकता, पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं के संरक्षण का जीवंत उदाहरण बना।

लोक संस्कृति की धरोहर है देवगोत मेला

देवगोत मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर और सामूहिक आस्था का प्रतीक है। ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य-गान के माध्यम से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोक परंपराएं जीवित और सशक्त हैं।

 

क्षेत्र की समृद्धि की कामना

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने लोक देवता सोमेश्वर महादेव से प्रार्थना की कि वे क्षेत्र पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें और जन-जन के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।

स्थानीय निवासी पर्यटन व्यवसायी एवं लोक संस्कृति के संरक्षक चैन सिंह रावत ने बताया कि देवगोत मेले के सफल आयोजन से सौड़-सांकरी गांव में उत्सव का वातावरण बना रहा। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामूहिक एकता का प्रेरक उदाहरण भी बना.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *