राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन: तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य पर हुआ मंथन
राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन: तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य पर हुआ मंथन
टिहरी-
राजकीय महाविद्यालय खाड़ी के प्राचार्य प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह के निर्देशन में शिक्षा शास्त्र की डॉक्टर संगीता बिज्लवाण जोशी द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में आयोजित किया। इस संगोष्ठी की संयोजिका डॉ संगीता व सचिव डॉ मीना रही ।संगोष्ठी का विषय “शिक्षा की भूमिका : विद्यार्थियों एवं समुदायों में तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन” रखा गया है।
संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. एन. सी. त्रिवेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं के रूप में प्रोफेसर ओम प्रकाश पांडे (प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक) तथा ऑनलाइन माध्यम से प्रोफेसर गिरिश्वर मिश्रा (पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा) ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर मनोचिकित्सक डॉ. नीरज कर्दम (जिला अस्पताल, टिहरी), डॉ. पंकज कुमार (NIEPVD, देहरादून), डॉ. अटल बिहारी त्रिपाठी (श्री देव सुमन विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर), डॉ. विजय कुमार राय (प्राचार्य, मॉडर्न कॉलेज ऑफ एजुकेशन, पंजाब) तथा डॉ. अमित कुमार जायसवाल (प्रोफेसर, श्री देव सुमन विश्वविद्यालय, गोपेश्वर परिसर) ने भी तनाव प्रबंधन विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में तनाव के प्रमुख कारणों एवं उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि संतुलित मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग, नियमित व्यायाम, प्रेरणादायक पुस्तकों का अध्ययन तथा संगीत जैसे उपाय अत्यंत प्रभावी हैं। साथ ही, जीवनशैली में संतुलन बनाकर व्यक्ति न केवल अपने कार्यक्षेत्र में बल्कि पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विशेषज्ञों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से सक्रिय सहभागिता की और विषय पर सार्थक विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस का समापन प्रोफेसर निरंजना शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित पहले तकनीकी सत्र में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्वानों द्वारा कई शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की डॉ. कल्पना ठाकुर ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए डिजिटल डिटॉक्स पर प्रस्तुति दी। उन्होंने युवा पीढ़ी, विशेष रूप से युवाओं और जेनरेशन जेड के बीच डिजिटल जुड़ाव में वृद्धि और डिजिटल डिटॉक्स प्रथाओं की आवश्यकता पर चर्चा की। मेघालय के कैप्टन विलियमसन संगमा स्टेट यूनिवर्सिटी के समाज कार्य विभाग की सुश्री गेमर सीमा ने पारिवारिक पारिस्थितिकी और बाल मानसिक स्वास्थ्य पर प्रस्तुति दी। उन्होंने मेघालय में पारिवारिक वातावरण, पालन-पोषण प्रथाओं और बाल मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध की जांच करने के लिए मौजूदा साहित्य की व्यवस्थित समीक्षा की। उत्तर प्रदेश के केआर गर्ल्स पीजी कॉलेज की कोमल वार्ष्णेय ने करियर संबंधी निर्णय लेने में पारिवारिक वातावरण की भूमिका पर प्रस्तुति दी। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब की सुश्री अल्विना ने तनाव प्रबंधन के उपकरण के रूप में शिक्षा विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षार्थियों, शिक्षकों और समुदायों के बीच कल्याण और लचीलेपन को बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस का समापन प्रोफेसर निरंजना शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित पहले तकनीकी सत्र में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्वानों द्वारा कई शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की डॉ. कल्पना ठाकुर ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए डिजिटल डिटॉक्स पर प्रस्तुति दी। उन्होंने युवा पीढ़ी, विशेष रूप से युवाओं और जेनरेशन जेड के बीच डिजिटल जुड़ाव में वृद्धि और डिजिटल डिटॉक्स प्रथाओं की आवश्यकता पर चर्चा की। मेघालय के कैप्टन विलियमसन संगमा स्टेट यूनिवर्सिटी के समाज कार्य विभाग की सुश्री गेमर सीमा ने पारिवारिक पारिस्थितिकी और बाल मानसिक स्वास्थ्य पर प्रस्तुति दी। उन्होंने मेघालय में पारिवारिक वातावरण, पालन-पोषण प्रथाओं और बाल मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध की जांच करने के लिए मौजूदा साहित्य की व्यवस्थित समीक्षा की। उत्तर प्रदेश के केआर गर्ल्स पीजी कॉलेज की कोमल वार्ष्णेय ने करियर संबंधी निर्णय लेने में पारिवारिक वातावरण की भूमिका पर प्रस्तुति दी। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, पंजाब की सुश्री अल्विना ने तनाव प्रबंधन के उपकरण के रूप में शिक्षा विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षार्थियों, शिक्षकों और समुदायों के बीच कल्याण और लचीलेपन को बढ़ाने पर जोर दिया।
