उत्तराखंडनैनबाग

नेशनल प्लेयर से इंटरनेशनल मास्टर ट्रेनर बनीं रिजवाना पठान, पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा ने किया सम्मानित  

नेशनल प्लेयर से इंटरनेशनल मास्टर ट्रेनर बनीं रिजवाना पठान, पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा ने किया सम्मानित  

 

नैनबाग(शिवांश कुंवर)- उत्तराखंड की बेटी और आयनबॉल इंटरनेशनल फेडरेशन की मास्टर ट्रेनर रिजवाना पठान ने खेल जगत में कामयाबी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गुजरात और बिहार में नेशनल स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद, रिजवाना अब कोचिंग के क्षेत्र में देश भर के खिलाड़ियों और सुरक्षाबलों को तैयार कर ‘नारी शक्ति’ की मिसाल पेश कर रही हैं।

 

रिजवाना ने गुजरात पुलिस को विशेष ट्रेनिंग दी और डिफेंस मिनिस्ट्री के साथ मिलकर देश भर में NCC के अधिकारियों व कैडेट्स को प्रशिक्षित किया है। हाल ही में, उनके मार्गदर्शन में, उत्तराखंड की टीम ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में आयोजित अंडर-14 और अंडर-17 प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। इस सफलता का सम्मान पंजाब के गवर्नर ने किया, जिन्होंने उद्घाटन किया और वहां के ओलंपिक संघ के अध्यक्ष ने भी टीम को सम्मानित किया।

 

इन सभी उपलब्धियों को देखते हुए उत्तराखंड के पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा ने आज अपने पैतृक निवास चिलामु नैनबाग में एक बड़े आयोजन का आयोजन किया, जहां बच्चों ने आयनबॉल खेला और रिजवाना पठान का सम्मान किया। यह उनकी एक बड़ी उपलब्धि है, जो लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, और यह नारी शक्ति का उदाहरण है कि कैसे वह एक सशक्त भारत का निर्माण कर सकती है।

 

रिजवाना पठान ने बताया कि हमारे उत्तराखंड के कोच, मनीष रावत और उन्होंने मिलकर देखा कि पहाड़ के बच्चों के लिए आयनबॉल एक बेहतरीन विकासात्मक खेल है, जो शुरुआती उम्र में ही बच्चों को डिफेंस स्किल्स प्रदान करता है। पहाड़ के बच्चों के पास जहां अवसर और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है, वहीं उनका प्रतिभा बहुत अधिक है, और इस खेल के माध्यम से उस प्रतिभा को निखारा जा सकता है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश है कि इस खेल को ग्राम स्तर तक बच्चों तक पहुँचाया जाए, और जल्द ही चिलामु नैनबाग में एक मुहिम की शुरुआत की जा रही है, जिसमें नारायण सिंह राणा के मार्गदर्शन में एक योजना बनाई जा रही है, जिससे जल्द ही आयनबॉल को खेल महाकुंभ का हिस्सा बना दिया जाएगा। यह योगदान 2047 के विकसित भारत के लिए एक प्रेरणादायक कदम है, और साथ ही 2036 के पीएम मोदी के सपने, जिसमें भारत को टॉप 10 देशों में लाना है, उस सपने को भी साकार करने में मदद करेगा।

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