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उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक में बकरियों की रहस्यमय मौत से हड़कंप, विभाग के रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक में बकरियों की रहस्यमय मौत से हड़कंप, विभाग के रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

 

उत्तरकाशी.
उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी ब्लॉक के स्युना गाँव से बेहद चिंताजनक और परेशान करने वाली खबर है। भेड़-पालकों के लिए उनकी भेड़-बकरियां ही उनकी आजीविका और जीवनयापन का मुख्य साधन होती हैं, ऐसे में उनका इस तरह रहस्यमय तरीके से मरना स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक बड़ा आर्थिक और मानसिक संकट है।

बात करे भेड़ पालक सुरेंद्र भट्ट व् उनके सहयोगी की तो उन्होंने बताया की पिछले कुछ दिनों से उनकी बकरिया बीमार होकर मृत हो रही है. जिससे उनको काफ़ी नुकशान हुआ. इसकी सुचना इन्होने पशु पालन विभाग को दी. संबंधित विभाग से पशुपालक ना खुश दिखे. सुरेंद्र भट्ट का कहना है विभाग द्वारा सही से कार्य नहीं किया जा रहा है. जिससे हर दिन बकरिया मृत हो रही है.

धनोल्टी एक्सप्रेस की टीम ने उत्तरकाशी पशु पालन विभाग के CVO H.S बिस्ट से इस संबंध मे जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बताया.इस तरह की रहस्यमय मौतों के पीछे आमतौर पर कुछ मुख्य कारण हो सकते है.संक्रामक बीमारियां पहाड़ों में अक्सर पीपीआर (PPR – Peste des Petits Ruminants)जिसे बकरियों का प्लेग भी कहते हैं. या चेचक (Goat Pox)और खुरपका-मुँहपका (FMD)जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं।
दूषित खान-पान जंगलों या चरागाहों में किसी जहरीली घास को खाने या दूषित पानी पीने की वजह से भी ऐसा हो सकता है।मौसम में अचानक बदलाव, अत्यधिक ठंड, नमी या अचानक बदले मौसम के कारण निमोनिया होना भी एक आम वजह होती है।पशुपालन विभाग के CVO H.S बिस्टbद्वारा पोस्टमार्टम और सैंपल लेने की बात कहीं गईं है.हालांकि अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है.

​जब किसी ग्रामीण परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन (उनकी भेड़-बकरियां) इस तरह अचानक खत्म होने लगता है, तो उनका परेशान और आक्रोशित होना लाजमी है।
​भेड़-पालकों की नाराजगी और चिंता के मुख्य कारण
​जांच रिपोर्ट में देरी पोस्टमार्टम के बाद सैंपल अक्सर राज्य या अन्य केंद्रीय लैब भेजे जाते हैं। इनकी रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। तब तक दवा या सही इलाज के अभाव में अन्य बकरियां भी दम तोड़ रही हैं।
​आर्थिक संकट और मुआवजे की अनिश्चितता से पशुपालकों को सबसे बड़ा डर यह होता है कि जो नुकसान हो चुका है, उसकी भरपाई कैसे होगी। सरकारी मुआवजे की प्रक्रिया अक्सर जटिल होती है, जिससे वे खुद को असहाय महसूस करते हैं।

​सटीक इलाज तुरंत न मिलने से जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक डॉक्टर केवल लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं, जिससे मौतों का सिलसिला तुरंत नहीं थमता और पालकों का भरोसा डगमगाने लग रहा है।

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