उत्तरकाशीउत्तराखंड

19वीं गोमुख संकल्प कलश यात्रा का उत्तरकाशी में भव्य स्वागत, मानवता के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प.

 

19वीं गोमुख संकल्प कलश यात्रा का उत्तरकाशी में भव्य स्वागत, मानवता के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प.

 

उत्तरकाशी

धार्मिक, आध्यात्मिक जन जागरण एवं पर्यावरण संरक्षण संवर्धन जन चेतना अभियान के अंतर्गत आयोजित 19वीं गोमुख संकल्प कलश यात्रा शनिवार को उत्तरकाशी पहुंच गई। यहां पहुंचने पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों द्वारा यात्रा का ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ जोरदार स्वागत किया गया।

 

 

*ऋषिकेश से हुआ यात्रा का भव्य शुभारंभ.*

 

पर्यावरण संरक्षण संवर्धन जन चेतना अभियान एवं गोमुख संकल्प यात्रा के संस्थापक अध्यक्ष महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि 27 जून से 1 जुलाई तक आयोजित होने वाली इस पांच दिवसीय यात्रा का शुभारंभ ऋषिकेश स्थित त्रिवेणी घाट पर हुआ। वहां मां गंगा के विशेष पूजन एवं महाअभिषेक के साथ यात्रा का आगाज किया गया। उन्होंने कहा कि यह विशेष पूजन समस्त मानवता के कल्याण, सुख, शांति और विश्व में समृद्धि की कामना के लिए किया गया है।

 

 

*विभिन्न पड़ावों से होकर पहुंची उत्तरकाशी*

 

महंत रवि प्रपन्नाचार्य महाराज के अनुसार, यात्रा का औपचारिक शुभारंभ शनिवार प्रातः 8 बजे ऋषिकेश के ऐतिहासिक भगवान भरत मंदिर से हुआ। महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज की अध्यक्षता में आयोजित एक गरिमामय समारोह में कलश यात्रा को हरी झंडी दिखाकर गंतव्य के लिए रवाना किया गया। यह यात्रा मार्ग में पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों पर जन-जागरूकता फैलाते हुए शाम को उत्तरकाशी पहुंची।हनुमान मंदिर में जुटे प्रबुद्ध जन

उत्तरकाशी स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में यात्रा के पहुंचने पर एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया।

 

 

इस अवसर पर क्षेत्र के कई नागरिक और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थेप्रताप पोखरियाल (पर्यावरण प्रेमी),प्रेम सिंह पंवार (कार्यकारी अध्यक्ष, हनुमान मंदिर),डॉ. द्वारिका प्रसाद नौटियाल (प्राचार्य, संस्कृत महाविद्यालय),महेंद्र खरे (प्रबंधक, महर्षि आश्रम),डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल (संस्थापक, गंगा विश्व धरोहर मंच),लोकेंद्र परमार एवं सुभाष चन्द्र नौटियाल।

 

*यात्रा का मुख्य उद्देश्य:*

 

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों में धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना जगाने के साथ-साथ प्रकृति के अनमोल उपहार.गंगा और हिमालय (गोमुख) के पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता पैदा करना है। पांच दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 1 जुलाई को अपने गंतव्य पर संपन्न होगी।

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