उत्तरकाशीउत्तराखंड

धराली, हर्षिल में भगीरथी का बढ़ रहा जल स्तर, विधायक सुरेश चौहान ने सरकार से गाद (RBM)हटाने के लिए नियमों में ढील देने की मांग

 

धराली, हर्षिल में भगीरथी का बढ़ रहा जल स्तर, विधायक सुरेश चौहान ने सरकार से गाद (RBM)हटाने के लिए नियमों में ढील देने की मांग

 

उत्तरकाशी

पहाड़ में लगातार हो रही बरसात के कारण हर्षिल के धराली गाँव में गंगा (भागीरथी) नदी का जल स्तर काफी बढ़ गया है। स्थिति का जायजा लेने के लिए गंगोत्री विधानसभा सीट से विधायक सुरेश चौहान खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। उन्होंने नदी के तटबंधों और चल रहे सुरक्षा कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया।

 

 

*नदी को किया गया चैनलाइज, आबादी क्षेत्र अब सुरक्षित- गंगोत्री विधायक*

 

विधायक सुरेश चौहान ने बताया कि प्रशासन और सिंचाई विभाग द्वारा नदी के बहाव को मोड़ने (डायवर्जन) का काम लगातार जारी है। नदी को दूसरी तरफ से चैनलाइज कर सुरक्षित दिशा में मोड़ा गया है, जिससे स्थानीय आबादी के लिए खतरा काफी कम हो गया है। हालांकि, एहतियात के तौर पर अभी भी एक अस्थायी सुरक्षा दीवार (बाड़ा) बनाने का काम चल रहा है।

 

 

*₹10.5 करोड़ स्वीकृत, पर बढ़ते जल स्तर से स्थायी काम में बाधा*

 

 

सुरेश चौहान ने कहा की इस क्षेत्र में सुरक्षा कार्यों के लिए सरकार द्वारा लगभग साढ़े 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। लेकिन गंगा का जल स्तर इतना अधिक बढ़ चुका है कि इस समय स्थायी निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं हो पा रहा है। जैसे ही जल स्तर सामान्य होगा, काम में तेजी लाई जाएगी।

 

*मुख्यमंत्री और प्रशासन रख रहे हैं पैनी नजर*

 

क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। विधायक ने कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री स्वयं इस स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हाल ही में जिलाधिकारी (DM), एडीएम (ADM) और एसडीएम (SDM) ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण किया है।

उन्होंने माना कि मानसून के अगले 1-2 महीने चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन पूर्व में नदी में झील बनने की जो आशंका थी, वह चैनलाइजिंग के काम के बाद अब समाप्त हो चुकी है।

 

 

*इको-सेंसिटिव जोन’ के नियम बने बड़ी बाधा, सीएम को लिखा पत्र*

 

निरीक्षण के दौरान विधायक ने एक बड़ी समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि नदी में भारी मात्रा में गाद (सिल्ट, RBM ) और मलबा जमा हो गया है। पहाड़ टूटने के कारण सारा मलबा नदी में समा जाता है, जिससे नदी का जल स्तर लगातार ऊपर उठ रहा है। इसके कारण उत्तरकाशी शहर, नदी किनारे बसे गाँव और राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को लगातार खतरा बना हुआ है।

 

 

विधायक ने कहा इको-सेंसिटिव जोन और पर्यावरण नियमों की बंदिशों के कारण नदी से गाद (RBM )नहीं निकाली जा पा रही है। इस गंभीर समस्या को लेकर मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने भी भारत सरकार को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि इको-सेंसिटिव जोन के कानूनों में थोड़ी ढील दी जाए, ताकि नदी से गाद (RBM )को हटाया जा सके और भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सके।

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