सुषमा नौटियाल बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल, फूलों की खेती से बढ़ी आय
सुषमा नौटियाल बनीं महिला सशक्तिकरण की मिसाल, फूलों की खेती से बढ़ी आय
उत्तरकाशी
उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी विकासखंड स्थित ग्राम लौंथुरू की सुषमा नौटियाल गंगा मैया स्वयं सहायता समूह से जुड़कर पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक स्तर पर फूलों की खेती अपनाकर आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद सुषमा ने अपनी 1.5 नाली भूमि पर गेंदे सहित विभिन्न प्रजातियों के फूलों का उत्पादन शुरू किया।
अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने पिछले वर्ष 9 हजार रुपये के फूल बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित की, जबकि इस वर्ष अब तक 17 हजार से अधिक रुपये के फूलों की बिक्री कर चुकी हैं और उत्पादन जारी है। उनके उत्पादों की मांग उत्तरकाशी के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ गंगोत्री धाम,काशी विश्वनाथ मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी बनी रहती है, जहां फूलों का उपयोग पूजा-अर्चना और मंदिरों की सजावट में किया जाता है। फूलों की खेती से सुषमा की आय में वृद्धि हुई है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी परिवर्तन हुई है।

उनकी सफलता क्षेत्र की अन्य महिलाओं और किसानों को भी पारंपरिक फसलों के साथ फूलों जैसी नकदी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में कम भूमि पर बेहतर आमदनी की संभावनाओं के कारण फूलों की खेती रोजगार और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। कृषि, उद्यानिकी और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आधुनिक कृषि, उद्यानिकी और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन मिलने से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के प्रयासों को गति मिली है। सुषमा नौटियाल की सफलता यह दर्शाती है कि मेहनत, नवाचार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं अपनी आय बढ़ाने के साथ परिवार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं।
