भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण की मुलाकात से गरमाई सियासत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण की मुलाकात से गरमाई सियासत
उत्तरकाशी
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुहाट तेज होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक चुनाव प्रचार का जोर दिखने लगा है। इस चुनावी गहमागहमी के बीच सबसे ज्यादा नजरें उत्तरकाशी जिले की प्रतिष्ठित गंगोत्री विधानसभा सीट पर टिकी हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में गंगोत्री सीट को लेकर एक ऐतिहासिक और दिलचस्प मिथक कायम है.जिस दल का प्रत्याशी गंगोत्री से जीत दर्ज करता है, राज्य में सरकार भी उसी दल की बनती है।
2022 के चुनाव में भी यह समीकरण सही साबित हुआ था। ऐसे में इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर मंथन का दौर बेहद तेज हो गया है।
*क्या फिर दोहराएगा गंगोत्री का मिथक?*
सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी गंगोत्री का यह मिथक कायम रहेगा? भाजपा इस बार अपनी जीत को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान गंगोत्री सीट पर किसी ऐसे चेहरे पर दांव खेलने की रणनीति बना रहा है जिसकी जनता के बीच मजबूत स्वीकार्यता हो और जो सीट को पूरी तरह ‘सेफ जोन’ में रख सके।
इसी रणनीति के तहत यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या भाजपा इस बार अपने वर्तमान विधायक के बजाय किसी अन्य दिग्गज पर भरोसा जताएगी? 2022 के चुनावों की तरह ही इस बार भी भाजपा के भीतर से ही गंगोत्री से कई स्थानीय नेता अपनी-अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
*महेंद्र भट्ट और विजयपाल सजवाण की मुलाकात से बढ़ी हलचल*
हाल ही में बीते रविवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने गंगोत्री विधानसभा के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण से यमुना कॉलोनी स्थित अपने आवास पर एक लंबी राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चा की। इस मुलाकात को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है, क्योंकि खुद प्रदेश अध्यक्ष ने इसकी तस्वीर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की।
इस एक फोटो ने गंगोत्री के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। विजयपाल सजवाण गंगोत्री से पूर्व विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र के जनाधार पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। यदि भाजपा किसी ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतारने की सोच रही है जो गुटबाजी से परे होकर सीट निकालकर दे सके, तो सजवाण का नाम इस दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे रहा है।
*आलाकमान की एकजुटता या भीतरघात का खतरा?*
हालांकि टिकट के दावेदारों को लेकर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह से कद्दावर नेताओं की आवाजाही और बैठकें बढ़ रही हैं, उससे दो तरह की तस्वीरें उभर रही हैं.
1- एकजुटता का संदेश- पार्टी नेतृत्व सभी प्रभावशाली नेताओं को एक मंच पर लाकर गंगोत्री को सुरक्षित करने की कोशिश में है।
2 – गुटबाजी की आशंका- कई दावेदारों के मैदान में होने के कारण यदि ऐन वक्त पर किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनी, तो क्या पार्टी अंदरूनी गुटबाजी का शिकार हो जाएगी?
*आगे क्या?*
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम इस बात का संकेत है कि पार्टी गंगोत्री में किसी भी तरह का एंटी-इंकंबेंसी का रिस्क नहीं लेना चाहती। अब सभी की निगाहें भाजपा आलाकमान के अंतिम फैसले पर टिकी हैं.क्या भाजपा पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण को सेफ कार्ड बनाकर मैदान में उतारेगी या फिर कोई नया समीकरण देखने को मिलेगा? गंगोत्री का रण इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है।
