बाघ के आतंक से सहमा जौनपुर, ग्रामीणों ने वन विभाग के सामने उठाई गंभीर समस्याएं
बाघ के आतंक से सहमा जौनपुर, ग्रामीणों ने वन विभाग के सामने उठाई गंभीर समस्याएं
पालतू पशुओं पर लगातार हमले, ग्रामीणों में भय का माहौल; वन्यजीवों से फसलों को भी भारी नुकसान
नैनबाग (शिवांश कुंवर)
मसूरी वन प्रभाग एवं क्षेत्रीय जनता की एक अहम बैठक शनिवार को नैनबाग स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे वन्यजीवों के आतंक, बाघ द्वारा पालतू पशुओं को निवाला बनाए जाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न हो रहे भय के माहौल को लेकर गंभीर चर्चा की गई।
प्रधान संगठन अध्यक्ष प्रदीप कवि ने कहा कि जौनपुर क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बाघ की सक्रियता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। पालतू पशुओं पर हमले की घटनाओं के साथ-साथ बाघ के गांवों के आसपास दिखाई देने से ग्रामीणों में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी बढ़ाने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की।
बाघ के आतंक के कारण क्षेत्र की जनता में लगातार भय बढ़ रहा है। पालतू पशुओं को बाघ द्वारा निवाला बनाए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं गांवों के आसपास बाघ की मौजूदगी और लोगों पर झपटने जैसी घटनाओं से ग्रामीण चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं, ताकि भविष्य में कोई गंभीर घटना न हो।
ग्राम जयद्वार मल्ला के ग्रामीण सुनील पंवार ने कहा कि उनके गांव में बाघ के साथ-साथ भालू, बंदर, सूअर और लंगूर जैसे वन्यजीवों की समस्या भी लगातार बढ़ रही है। इन वन्यजीवों से ग्रामीणों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है और गांव में भय का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
वहीं ग्राम प्रधान विक्रम चौहान ने क्षेत्र में ग्रामीणों से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले चार-पांच वर्षों से जौनपुर क्षेत्र के ग्रामीणों को देवदार की पीढ़ी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने वन विभाग से इस समस्या के समाधान की दिशा में भी आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की।
बैठक में ग्रामीणों ने वन्यजीवों से होने वाले फसलों के नुकसान, पालतू पशुओं की सुरक्षा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं।
मसूरी वन प्रभाग के डीएफओ डीपी बलूनी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए कहा कि विभाग इस संबंध में लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से भी वन विभाग को सहयोग देने की अपेक्षा जताई।
बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका की रक्षा भी जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाघ एवं अन्य वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
इस मौके पर वन प्रभाग मसूरी डीएफओ डी, डी बलूनी,एसडीओ दिनेश नोडियाल, राम दयाल शाह (जिला पंचायत सदस्य), प्रदीप कवि (प्रधान सगठन अध्यक्ष), गोविन्द सिँह चौहान(भद्रीगाड़ रेंज),अर्जुन सिँह कंडारी,जयदेव सिँह रावत,गंभीर रावत विक्रम चौहान,विपिन पंवार,रवि पंवार,दिपेन्द्र बिष्ट,अनिल गुलशन कवि,गुलशन कवि आदि मौजूद रहे।
