आयुर्वेदिक उपचार से एलोपेशिया एरियाटा के प्रबंधन की ओर बढ़ीं सुनीता
नरेंद्रनगर स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में शोधन चिकित्सा एवं आयुर्वेदिक औषधियों से किया गया उपचार
आयुर्वेद की उपचार पद्धति से एलोपेशिया एरियाटा के प्रबंधन का सफल प्रयास
आयुर्वेदिक चिकित्सा से सुनीता को बाल झड़ने की समस्या में राहत
टिहरी गढ़वाल
बालों का झड़ना और सिर की त्वचा पर जगह-जगह बालों का कम होना व्यक्ति के आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। ऐसी ही समस्या से जूझ रहीं सुनीता के मामले में नरेंद्रनगर स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय नरेंद्रनगर, टिहरी गढ़वाल में आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार किया गया।
सुनीता को करीब छह माह से सिर के ऊपरी हिस्से (Crown of Scalp) पर बाल झड़ने की समस्या थी। जांच में सिर की त्वचा पर लगभग 2–3 पैच पाए गए। चिकित्सकीय रूप से इसे Alopecia Areata के रूप में दर्ज किया गया, जिसका आयुर्वेदिक संदर्भ इन्द्रलुप्त से जोड़ा गया है।
इस मामले में अपर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. वंदना डंगवाल द्वारा उपचार की योजना तैयार की गई। उपचार के अंतर्गत शोधन चिकित्सा में दीपन पाचन,जलौकावचरण (Jalaukavacharana) सप्ताह में एक बार, दो माह तक किए जाने की योजना बनाई गई, जिसमें लगभग आठ सिटिंग निर्धारित थीं। इसके साथ शमन चिकित्सा (आयुर्वेदिक औषधियों का प्रयोग ),लेपन कर्म (स्थानीय लेप) का भी प्रयोग किया गया ।
आयुर्वेदिक औषधियां
1.संजीवनी वटी
2.महामंजिष्ठादि क्वाथ
3.भृंगराज चूर्ण
4.त्रिफला चूर्ण
5.भृंगराज चूर्ण लेप
उपचार के दौरान रोगी की स्थिति को क्लीनिकल फोटोग्राफ्स के माध्यम से दस्तावेजीकृत किया गया।
उपचार के पश्चात रोगी के लक्षणों में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगा। नियमित उपचार के साथ सिर की त्वचा पर जहां पहले बाल झड़ने के कारण पैचेज बन गए थे, वहां क्रमशः बालों की पुनः वृद्धि देखी गई। धीरे-धीरे प्रभावित स्थानों पर बाल वापस आने लगे और पैचेज का क्षेत्र कम होता गया। इस सुधार से रोगी को काफी संतोष एवं राहत महसूस हुई।
चिकित्सक का संदेश
इस संबंध में डॉ. वंदना डंगवाल का कहना है कि आयुर्वेद केवल रोग होने के बाद उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का भी मार्गदर्शन करता है। आयुर्वेदिक जीवनशैली में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवन को महत्व दिया जाता है। यदि हम इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं, तो कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने और स्वास्थ्य के प्रति समय रहते सावधानी बरतने में मदद मिल सकती है। उनके अनुसार, आयुर्वेद की जीवनशैली को अपनाकर व्यक्ति अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रह सकता है और स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ सकता है।


