राज्यस्तरीय संस्कृत स्पर्धा में टिहरी का शानदार प्रदर्शन, समूह नृत्य में प्रथम स्थान
हरिद्वार- उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम्, हरिद्वार की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय संस्कृत स्पर्धा-2026 में टिहरी गढ़वाल के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जनपद का नाम रोशन किया। हरिद्वार के भूपतवाला स्थित महाजन भवन में आयोजित अष्टादश संस्कृत महोत्सव में टिहरी के विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किए।कनिष्ठ वर्ग में पतंजलि गुरुकुलम्, मूल्याग्राम देवप्रयाग ने संस्कृत समूहनृत्य में प्रथम स्थान हासिल किया। इसी वर्ग में केशव दर्शन महाविद्यालय, मुनिकी रेती के प्रतिभागी ने संस्कृत आशुभाषण में तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि कृष्णा उनियाल ने श्लोकोच्चारण में तृतीय स्थान हासिल किया।वरिष्ठ वर्ग में नरेंद्र महिला इंटर कॉलेज, भागीरथीपुरम, चंबा ने संस्कृत समूहनृत्य में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
पतंजलि गुरुकुलम् की प्रिया और जाह्नवी ने संस्कृत वाद-विवाद में द्वितीय स्थान हासिल किया। इसी संस्थान की संध्या ने श्लोकोच्चारण में द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि श्री दर्शन महाविद्यालय, मुनिकी रेती के अक्षित बहुगुणा ने संस्कृत आशुभाषण में तृतीय स्थान हासिल किया।उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 95 विकासखंडों के बाद 13 जनपदों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। राज्यस्तरीय आयोजन में संस्कृत नाटक, समूहगान, समूहनृत्य, वाद-विवाद, आशुभाषण और श्लोकोच्चारण सहित छह विधाओं में कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्ग के लगभग 950 विद्यार्थियों एवं दल शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। जनपद संयोजक शैलेन्द्र दत्त डोभाल और सह संयोजक डॉ. चंद्रशेखर नौटियाल ने सभी विजेता विद्यार्थियों और मार्गदर्शक शिक्षकों को बधाई दी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी कमला बड़वाल और सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा पूर्णानंद भट्ट सहित संबंधित अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय विद्यार्थियों, शिक्षकों, खंड संयोजकों और विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के सामूहिक प्रयासों को दिया।प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त नहीं करने वाले प्रतिभागियों को भी प्रमाणपत्र दिए गए। वहीं, आयोजन में योगदान देने वाले खंड संयोजकों, खंड शिक्षा अधिकारियों, दल शिक्षकों और अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।जनपद संयोजक शैलेंद्र दत्त डोभाल ने निर्णायकों का निष्पक्ष चयन के लिए आभार जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि आगामी वर्षों में विद्यार्थी और अधिक उत्साह से संस्कृत प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करेंगे। उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे दैनिक व्यवहार में अपनाने पर भी जोर दिया।


