गंगा के मायके से उठी चिंता की पुकार – राष्ट्रपति से पुरस्कृत ‘बगोरी’ गाँव में पसरा गंदगी का अंबार
गंगा के मायके से उठी चिंता की पुकार – राष्ट्रपति से पुरस्कृत ‘बगोरी’ गाँव में पसरा गंदगी का अंबार
उत्तरकाशी
गंगोत्री नेशनल हाईवे से सटा और हर्षिल घाटी (टकनोर वैली) की गोद में बसा खूबसूरत ‘बगोरी’ गाँव आज अपनी पहचान खोने की कगार पर दिख रहा है। कभी अपनी बेमिसाल स्वच्छता के लिए महामहिम राष्ट्रपति द्वारा ‘स्वच्छ गाँव पुरस्कार’ से नवाजा गया यह गाँव, आज पर्यटकों की आमद और प्रशासन की अनदेखी के कारण कचरे के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा हर्षिल घाटी में ’12 महीने की यात्रा’ की शुरुआत करने के बाद यहाँ पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। लेकिन इस विकास का एक स्याह पहलू भी सामने आया है.अत्यधिक मात्रा में प्लास्टिक कचरा, गंदगी और पर्यावरण का विनाश।
*शुद्ध हवा और पानी पर ‘कचरे’ का ग्रहण*
बगोरी गाँव कभी अपनी शुद्ध हवा, शीतल जल और शांत वातावरण के लिए जाना जाता था। आज स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। हर तरफ बिखरा प्लास्टिक, खाने-पीने के रैपर्स और कचरा यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को निगल रहा है। विडंबना देखिए कि जो जल स्रोत ग्रामीणों के पीने के पानी का मुख्य जरिया हैं, वे इस गंदगी के कारण दूषित हो रहे हैं।
*गंगा के मायके में ही लग रहा दाग*
सबसे डरावनी और चिंताजनक बात यह है कि बगोरी गाँव से दूषित होकर बहने वाला यही पानी आगे जाकर पवित्र गंगा नदी में मिल रहा है। यानी जिस गंगा को स्वच्छ रखने के लिए देश में बजट दिए जा रहे हैं, वह अपने मायके (उद्गम स्थल के समीप) में ही प्रदूषित होने को मजबूर है।
*”हमारा गाँव कभी मिसाल था…”*
स्थानीय ग्रामीणों में इस दुर्दशा को लेकर भारी आक्रोश दिख रहा है। बगोरी के निवासियों का कहना है, “हमारे पुरखों ने इस घाटी को स्वर्ग जैसा संजोकर रखा था। राष्ट्रपति पुरस्कार मिलना हमारे लिए गर्व की बात थी, लेकिन आज बाहर से आने वाले पर्यटक और कचरा प्रबंधन की कमी हमारे अस्तित्व को खतरे में डाल रही है। अगर जल्द ही इस गंदगी पर रोक नहीं लगी, तो हम उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।”
*क्या बढ़ते पर्यटन के बीच ‘कचरा प्रबंधन’ फेल?*
टकनोर वैली में ‘ऑल वेदर’ टूरिज्म शुरू होने से स्थानीय रोजगार तो बढ़ा है, लेकिन ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) के पुख्ता इंतजाम न होने से यह वरदान अब अभिशाप बनता दिख रहा है। पर्यटकों की भारी भीड़ तो पहुँच रही है, लेकिन उनके द्वारा फैलाए जा रहे कचरे को ठिकाने लगाने की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है।
