उत्तरकाशीउत्तराखंड

क्या धराली में फिर दोहराएगी 2025 की तबाही? हर्षिल में बढ़ता गंगा का जलस्तर और प्रशासन कितना मुस्तैद? बढ़ा रही ग्रामीणों की धड़कनें 

 

 
क्या धराली में फिर दोहराएगी 2025 की तबाही? हर्षिल में बढ़ता गंगा का जलस्तर और प्रशासन कितना मुस्तैद? बढ़ा रही ग्रामीणों की धड़कनें 


उत्तरकाशी (वीरेंद्र सिंह नेगी)- पिछले वर्ष 5 अगस्त 2025 की वो खौफनाक तारीख शायद ही कोई उत्तरकाशी वासी भूल पाया होगा। खीर गंगा (गाड़) नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भारी भूस्खलन ने पल भर में धराली बाजार और गांव के एक बड़े हिस्से को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था। कई मकान और आलीशान होटल ताश के पत्तों की तरह ढह गए थे। विशेषज्ञों ने तब साफ किया था कि बादल फटने या हिमनद झील  के टूटने के कारण आया अत्यधिक मलबा और पुराने मलबे के प्रवाह क्षेत्र  पर बसी आबादी इस तबाही का मुख्य कारण थी। ​अब ठीक एक साल बाद, यानी वर्ष 2026 के इस मानसून सीजन में एक बार फिर ठीक वैसी ही भयावह स्थिति की सुगबुगाहट से सीमांत क्षेत्र के ग्रामीण सहमे हुए हैं।
हर्षिल पुलिस चौकी तक पहुंचा पानी, मंडराया खतरा

​बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण हर्षिल में भागीरथी (गंगा) नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। नदी के उफान का सीधा असर हर्षिल पुलिस चौकी पर देखने को मिला है, जहाँ पानी का बहाव सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती खड़ा कर रहा है। यदि जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो स्थिति हाथ से बाहर निकल सकती है।​बजट की कमी नहीं, तो सुरक्षा कार्यों में देरी क्यों?- भवान सिंह राणा, पूर्व प्रधान, बगोरी

​धराली, हर्षिल और बगोरी गाँव पर मंडराते इस खतरे को देखते हुए बगोरी गाँव के पूर्व प्रधान भवान सिंह राणा ने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सुरक्षात्मक कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।​पूर्व प्रधान ने अपनी बात पुरजोर तरीके से प्रशासन तक पहुंचाते हुए कहा.प्रशासन को समय रहते, यानी तुरंत प्रभाव से सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण के सभी पुख्ता इंतजाम कर लेने चाहिए। 2025 जैसी भीषण आपदा दुबारा न झेलनी पड़े, इसके लिए युद्धस्तर पर सुरक्षा दीवार और ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने की जरूरत है।पूर्व प्रधान ​भवान सिंह राणा ने बजट की उपलब्धता पर तीखा रुख अपनाया और कहा कि
​सरकार और प्रशासन के पास आपदा प्रबंधन और सुरक्षा कार्यों के लिए पर्याप्त मात्रा में बजट मौजूद है। सवाल बजट का नहीं, बल्कि उसके सही और समय पर उपयोग का है। अगर बजट का सही इस्तेमाल सही समय पर किया जाए, तो धराली, हर्षिल, बगोरी और आसपास के अन्य गांवों को बाढ़ की विभीषिका से सुरक्षित किया जा सकता है, जिससे किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि को रोका जा सके।

समय रहते नहीं जागे, तो भुगत सकते है गंभीर परिणाम?

​स्थानीय लोगों का भी यही मानना है कि यदि प्रशासन ने पिछले साल की आपदा से सबक लेते हुए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस बार भी नुकसान का आंकड़ा भारी हो सकता है। खीर गंगा और भागीरथी के मुहाने पर बसे ये गाँव इस समय एक संवेदनशील मोड़ पर खड़े हैं।​अब देखना यह होगा कि पूर्व प्रधान और ग्रामीणों की इस जायज चेतावनी को शासन-प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर एक और प्रशासनिक लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी को न्योता देगी।

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