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उत्तरकाशी में मंगसीर बग्वाल का आगाज 

उत्तरकाशी में मंगसीर बग्वाल का आगाज 

 

 

उत्तरकाशी:उत्तरकाशी की सांस्कृतिक धरोहर मंगसीर बग्वाल का शुभारंभ हर्षोल्लास से हुआ.कार्यक्रम का प्रथम दिवस बाल कलाकारों के नाम रहा.विधायक गंगोत्री सुरेश चौहान द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया.बाल बग्वाल के अवसर पर बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया

उत्तरकाशी CO जनक पंवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ बी एस रावत तथा मुख्य विकास अधिकारी जय भारत द्वारा सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया.सांस्कृतिक संध्या को लोक कलाकार सुन्दर प्रेमी ने अपने गीतों से सुसज्जित किया.मंगसीर बग्वाल का आयोजन 21 -23 नवंबर 2025 तक रामलीला मैदान उत्तरकाशी में किया जाएगा.

मंगसीर बग्वाल जिसे बूढ़ी दिवाली भी कहते हैं. उत्तराखंड में दीपावली के ठीक एक महीने बाद, कार्तिक माह में मनाया जाता है.यह एक सांस्कृतिक उत्सव है जो गढ़वाल क्षेत्र में सेनापति माधो सिंह भंडारी की विजय और वापसी की खुशी में मनाया जाता है.इस दौरान ‘भैला’, ‘तांदी’, और ‘रांसो’ जैसे लोक नृत्यों का आयोजन होता है और ग्रामीण जलती हुई लकड़ी के गोले घुमाते हैं।

 

मंगसीर बग्वाल का उल्लेख और महत्व-

ऐतिहासिक संदर्भ – गढ़वाल के वीर सेनापति माधो सिंह भंडारी की तिब्बत पर विजय और युद्ध से सुरक्षित वापसी की खबर कई दिनों बाद पहुंची थी.इस खुशी में दीपावली के एक महीने बाद मंगसीर बग्वाल मनाया गया था।

 

सांस्कृतिक प्रतीक- यह उत्सव उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय परंपराओं का प्रतीक है।

त्योहार की अवधि- यह उत्सव पाँच दिनों तक चलता है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में दीपों से जगमगाते हैं।

धार्मिक महत्व- इस अवसर पर देवता अपने मंदिरों से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देते हैं और भक्त अपने देवता की पालकी के साथ दौड़ते हैं, जो ईश्वर के प्रति निष्ठा और भक्ति का प्रतीक है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम- भैलों (जलती हुई लकड़ी के गोले घुमाना), तांदी, रांसो, और अन्य लोक नृत्य जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

आयोजन-उत्तरकाशी जैसे कई पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल इसका आयोजन किया जाता है।

 

इस अवसर पर राघवेंद्र उनियाल, अजय पुरी, रवीन्द्र सिंह नेगी, रमा डोभाल,सुभाष सिंह कुमाई,उत्तम सिंह गुसांई, रजनी चौहान, कन्हैया प्रसाद सेमवाल, शैलेंद्र मटुड़ा,हेमराज बलूनी, प्रताप बिष्ट, शैलेंद्र नौटियाल इत्यादि मौजूद रहे।

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