गंगोत्री: अधूरी सुरक्षा दीवार और भवनों में दरारें, मानसून की आहट से दहशत में तीर्थ पुरोहित और स्थानीय लोग
गंगोत्री: अधूरी सुरक्षा दीवार और भवनों में दरारें, मानसून की आहट से दहशत में तीर्थ पुरोहित और स्थानीय लोग
उत्तरकाशी (वीरेंद्र सिंह नेगी)- विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं, आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस गंगा के तट पर श्रद्धालु नमन कर रहे हैं, वहीं प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही किसी बड़े खतरे को दावत दे रही है? ₹4 करोड़ का बजट, एक साल का वक्त, फिर भी सुरक्षा दीवार अधूरी है। आखिर क्यों मलबे के ढेर पर खड़ी की जा रही है सुरक्षा की दीवार?
गायत्री सेमवाल का कहना है संबंधित विभाग द्वारा जो कार्य किया गया वो अधूरा किया गया है. जिससे उनके भवन मे दरारे आ चुकी है.बरसात के समय इस भवन मे रहना खतरे से खाली नहीं है. साथ ही गायत्री सेमवाल ने कहा कि इस अधूरे सुरक्षा दिवार को जल्द से जल्द लगाए संबंधित विभाग. जिससे भवन को कोई अनहोनी ना हो सके.
गंगोत्री धाम में इन दिनों देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की रौनक है। लेकिन इस आस्था के बीच सिंचाई विभाग की सुस्ती और लापरवाही की तस्वीरें डराने वाली हैं। आपदा प्रबंधन के तहत करीब ₹4 करोड़ की लागत से बनने वाली सुरक्षा दीवार आज भी कछुआ चाल से चल रही है।
पिछले साल शुरू हुआ यह निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। फिलहाल गंगा शांत हैं, लेकिन मानसून की आहट के साथ ही जलस्तर बढ़ेगा और तब यह अधूरा निर्माण और यहां जमा मलबे का अंबार किसी बड़ी आपदा का कारण बन सकता है।यह सुरक्षा दीवार हर साल बनती है और हर साल बह जाती है। बिना मलबा हटाए निर्माण करना केवल सरकारी बजट को ठिकाने लगाने जैसा है। यह क्षेत्र अति संवेदनशील है, फिर भी विभाग गंभीर नहीं दिख रहा है।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है? नदी के बीचों-बीच जमा मलबा हटाने में विभाग की अरुचि कई संदेह पैदा करती है।लाखों लोगों की आस्था का केंद्र गंगोत्री धाम क्या सरकारी फाइलों और बजट के खेल में उलझकर रह गया है? अगर समय रहते दीवार पूरी नहीं हुई, तो मानसून की लहरें इस लापरवाही का भारी हिसाब मांग सकती हैं।
