धराली आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और मुआवजे पर बोले गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान
तत्काल राहत और पुनर्वास के प्रयास
विधायक सुरेश चौहान ने कहा कि आपदा आते ही सबसे प्राथमिक कार्य वहां रह रहे लोगों को सुरक्षित बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पुनर्स्थापित करना था।
जिन लोगों के घर आपदा में नष्ट हो गए थे, उन्हें सरकार की ओर से ६ महीने का किराया देकर सुरक्षित स्थानों पर बसाया गया। प्रभावितों को मकानों के मुआवजे के तौर पर तत्काल ₹5 लाख की फौरी वित्तीय सहायता राशि प्रदान की गई।
विस्थापित परिवारों को नए आवास निर्माण हेतु बेनामी जमीन पर जगह उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा अनुमति दे दी गई है।
नियमों की बाध्यता और मुआवजे में आ रही रुकावटें
होटल और व्यावसायिक नुकसान के मुआवजे पर बात करते हुए विधायक ने स्वीकार किया कि कड़े नियमों के कारण कुछ मामले लटके हुए हैं,क्षेत्र में लगभग 116 से 123 होटलों को चिह्नित किया गया था, जिनमें से लगभग 95 होटलों के मामलों पर प्रक्रिया जारी है।
नियमों के अनुसार जो होटल या निर्माण 40-50 वर्षों से सरकारी जमीन पर बने दर्ज हैं, उनका मुआवजा रुक गया है।
पहाड़ी क्षेत्रों में लोग वर्षों से साधारण तरीके से रहते आए हैं और उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि भूमि उनके नाम पंजीकृत है या नहीं। ऐसे लगभग 22 से 23 प्रभावित परिवार हैं।विधायक चौहान ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री से पुनः अनुरोध करेंगे कि नियमों में ढील देकर इन प्रभावित परिवारों को भी मुआवजा दिया जाए, क्योंकि उनका भारी नुकसान हुआ है।
₹70 करोड़ का सुरक्षा चक्र और सुरक्षा कार्य
आपदा की रोकथाम और भावी सुरक्षा के लिए भारत सरकार को डीपीआर (DPR) भेजी गई थी, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है।
जिस नाले व स्थान से बादल फटा था, वहां के उपचार के साथ-साथ ककोड़ा गाड़, हर्षिल, भटवाड़ी और पास स्थित आर्मी कैंप क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ₹70 करोड़ की योजना स्वीकृत हुई है।
साथ ही कई स्थानों पर सुरक्षा कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
नदियों में गाद और नियमों में छूट की मांग
विधायक ने पर्यावरण व इको-सेंसिटिव ज़ोन के कारण आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर भी चिंता जताई,मलबे और गाद (गाद/सिल्ट) जमा होने से नदी का जलस्तर लगातार ऊपर उठ रहा है, जिससे किनारे बसी आबादी हमेशा खतरे में बनी रहती है।उन्होंने मांग की कि नियमों में ढील देकर नदियों से गाद हटाने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि उत्तरकाशी और आसपास की बस्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।
