गंगोत्री हाईवे पर BRO के निर्माण कार्य पर सवाल: 22 दिन में ही ढही करोड़ों की दीवार, घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
गंगोत्री हाईवे पर BRO के निर्माण कार्य पर सवाल: 22 दिन में ही ढही करोड़ों की दीवार, घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
सोनगाड़ में सुरक्षा दीवार गिरने से राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा पर उठे सवाल, आपदा स्वयंसेवक ने अधिकारियों की मिलीभगत और धांधली के लगाए गंभीर आरोप
उत्तरकाशी (वीरेंद्र सिंह नेगी)- गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनगाड़ नामक स्थान पर सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा बनाई जा रही करोड़ों रुपये की सुरक्षा दीवार (RCC Wall) महज़ 22 से 24 दिनों के भीतर ही ज़मींदोज़ हो गई।साथ ही लिमचिया गाड में भी टूट गया RCC दीवाल लगाए हुए कुछ दिन ही हुए थे. अभी भी इस पर सुरक्षा दिवाल का कार्य फिर से चल रहा है.
प्रशासन और आपदा राहत कार्यों में हर वक्त तत्पर रहने वाले आपदा स्वयंसेवक राजेश रावत ने बीआरओ के निर्माण कार्य और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
22 से 24 दिनों में ही ज़मींदोज़ हुई करोड़ों की दीवार
आपदा स्वयंसेवक राजेश रावत ने बताया कि सोनगाड़ क्षेत्र में बीआरओ द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जा रहा था। लेकिन निर्माण के महज़ तीन हफ्तों के भीतर ही इस दीवार का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य शुरू होते ही दीवार में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं, जिसकी जानकारी समय रहते जिला प्रशासन और बीआरओ महानिदेशक को पत्र के माध्यम से दी गई थी। इसके बावजूद बीआरओ के संबंधित ओसी (OC) और कमांडर द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया और न ही कार्य की गुणवत्ता में सुधार किया गया।
क्या सीमेंट बचाने के लिए R.C.C दीवार में भरे जा रहे बड़े पत्थर?
आपदा स्वयंसेवक राजेश रावत ने निर्माण की गुणवत्ता पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि आरसीसी (RCC) दीवार के निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राजेश रावत ने कहा कि आरसीसी दीवार के अंदर बड़े-बड़े पत्थर भरकर सीमेंट की भारी बचत की जा रही है, ताकि उस सीमेंट को कालाबाजारी (ब्लैक) में बेचा जा सके। यह राष्ट्र के धन का सीधा दुरुपयोग और जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
उच्च अधिकारियों की चुप्पी क्यों?
राजेश रावत ने कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री भारत सरकार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार की बीआरओ जैसी संस्थाएं और उनके ज़िम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर राष्ट्र-विरोधी व अहितकारी कार्य कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी दोषी ओसी और कमांडर के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
