उत्तरकाशी में बदहाली के आंसू रो रही गोडर क्षेत्र की लाइफलाइन, NH से 18 गांवों का संपर्क कटा
उत्तरकाशी में बदहाली के आंसू रो रही गोडर क्षेत्र की लाइफलाइन, NH से 18 गांवों का संपर्क कटा
उत्तरकाशी (रोबिन वर्मा)- जनपद के गोडर क्षेत्र की लाइफलाइन कहे जाने वाले ‘सारी गाड़ से नौगांव गोडर’ मार्ग की स्थिति आज बेहद दयनीय बनी हुई है। नेशनल हाईवे (NH) के ठेकेदार की घोर लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण 18 गांवों को आपस में जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क हर तीसरे दिन बंद हो जाती है।
26 अगस्त से मार्ग पूरी तरह ठप, फसलें हो रही बर्बाद
यह महत्वपूर्ण सड़क बीते 26 अगस्त से लगातार बंद पड़ी है। इसके कारण क्षेत्र के हजारों लोग पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं। मार्ग बंद होने का सबसे गंभीर असर स्थानीय किसानों पर पड़ा है। इस समय किसानों की नकदी फसलें (कैश क्रॉप्स) पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन समय पर मुख्य मंडियों तक न पहुंचने के कारण वे खेतों और वाहनों में ही सड़ रही हैं। जिस फसल पर किसानों की पूरे साल की आजीविका निर्भर करती है, उसके बर्बाद होने से ग्रामीणों को लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
रस्सियों के सहारे आजीविका बचाने की जंग: स्थानीय ग्रामीण
सड़क बंद होने से उपजे हालातों पर दर्द बयां करते हुए स्थानीय ग्रामीण राजेश पवार ने बताया, “रोड पूरी तरह बंद होने के कारण हमें अपनी नकदी फसल और दूध को रस्सियों के सहारे जैसे-तैसे मुख्य रोड तक पहुंचाना पड़ रहा है। यह बेहद जोखिम भरा और थका देने वाला काम है। हमारी पूरी मेहनत और सालभर की कमाई दांव पर लगी है। क्षेत्र के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अब आगे आना चाहिए और प्रशासन को इस गंभीर स्थिति पर जल्द से जल्द कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
वादे निकले हवा-हवाई, ‘ढाक के तीन पात’ रही स्थिति
लगभग एक महीना पहले स्थानीय सजग जनप्रतिनिधियों के कड़े दबाव के बाद जिलाधिकारी (DM) उत्तरकाशी और नेशनल हाईवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया था। उस दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि एक महीने के भीतर इस मार्ग का एक मजबूत वैकल्पिक रास्ता तैयार कर दिया जाएगा। हालांकि, प्रशासन का यह आश्वासन सिर्फ कागजी साबित हुआ और धरातल पर नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। जमीनी स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
मंडरा रहा है बड़ी अनहोनी का खतरा
यह सिर्फ मार्ग बंद होने या आर्थिक नुकसान तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा संकट भी है। लगातार हो रहे भूस्खलन के मलबे और जर्जर हो चुकी इस सड़क के बीच से होकर गुजरना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जर्जर पहाड़ी और मलबे के कारण यहाँ कभी भी कोई बड़ी अनहोनी या जानलेवा दुर्घटना घट सकती है।
शासन, प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के इस रवैये से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से रोड को पूरी तरह खोलने अथवा एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू करने की पुरजोर गुहार लगाई है।
