एम.ए. प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, फीस लेने के बाद छात्रा का परीक्षा फॉर्म रोका
एम.ए. प्रवेश प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, फीस लेने के बाद छात्रा का परीक्षा फॉर्म रोका
नैनबाग (शिवांश कुंवर)- राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में पिछले वर्ष एम.ए. प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक छात्रा को प्रवेश जांच समिति द्वारा एम.ए. प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश दिया गया और उससे फीस व रजिस्ट्रेशन शुल्क भी जमा कराया गया, लेकिन परीक्षा फॉर्म नहीं भरा गया,
मामले ने कॉलेज की प्रवेश जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि छात्रा निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करती थी तो प्रवेश के समय उसकी मार्कशीट और विषयों की जांच क्यों नहीं की गई? फीस लेने के बाद परीक्षा फॉर्म रोकने की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई?
वहीं, प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्रोस्पेक्टर/प्रवेश विवरणिका जारी नहीं किए जाने से भी छात्रों को विषय चयन, पात्रता और नियमों की सही जानकारी नहीं मिल सकी। छात्रों का कहना है कि यदि एम.ए. में विषयवार पात्रता का कोई नियम था तो इसकी जानकारी प्रवेश से पहले स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए थी, ताकि विद्यार्थियों का समय और पैसा बर्बाद न हो।
पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अर्जुन कैंतुरा ने कहा कि “छात्रों के भविष्य से जुड़ी प्रवेश प्रक्रिया में ऐसी लापरवाही गंभीर मामला है। प्रवेश के समय ही पात्रता की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए थी। फीस लेने के बाद परीक्षा फॉर्म रोकना छात्रहित में उचित नहीं है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”
हिमानी ने कहा कि “प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। छात्रों को प्रोस्पेक्टर, पात्रता और नियमों की जानकारी पहले देना कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रशासनिक स्तर की किसी गलती का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।”
मामले को महाविद्यालय के प्राचार्य के संज्ञान में भी लाया गया है। प्राचार्य द्वारा स्पष्ट किया गया कि मामले का जल्द ही निस्तारण किया जाएगा।
