शिमला मिर्च के गिरते दामों से किसान मायूस
शिमला मिर्च के गिरते दामों से किसान मायूस
मेहनत और लागत के मुकाबले बाजार भाव कम
किसानों को नहीं मिल रहा उपज का उचित मूल्य
नैनबाग (शिवांश कुंवर):
तहसील नैनबाग क्षेत्र में इन दिनों शिमला मिर्च समेत अन्य सब्जियों के लगातार कम दाम मिलने से काश्तकारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो रही है। खेतों में दिन-रात मेहनत करने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे किसानों में निराशा बढ़ती जा रही है।
क्षेत्र के ग्राम खर्क निवासी काश्तकार सुरेश रावत का कहना है कि शिमला मिर्च और अन्य सब्जियों की खेती में किसानों को काफी मेहनत, समय और लागत लगानी पड़ती है। बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और फसल को बाजार तक पहुंचाने में होने वाले खर्च के बाद जब उपज का भाव बेहद कम मिलता है तो किसान के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
सुरेश रावत ने कहा कि किसान जिस मेहनत से फसल तैयार करता है, उसके मुकाबले उसे बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कई बार खेत से बाजार तक पहुंचने में ही काफी खर्च हो जाता है, जबकि बिक्री के समय भाव उम्मीद से काफी कम रहता है। ऐसे में किसानों को अपनी मेहनत का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता।
किसानों का कहना है कि यदि सब्जियों के दाम इसी तरह कम बने रहे तो आने वाले समय में किसानों के लिए सब्जी उत्पादन करना मुश्किल हो सकता है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार कृषि और सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं, ऐसे में बाजार भाव में गिरावट का सीधा असर उनकी आमदनी और परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
