उत्तराखंड का 26 सालों का सफर – गंगोत्री विधानसभा की विकास गाथा, नेताओं का दांव और ‘सिस्टम’ का नया खेल

 

 

उत्तराखंड का 26 सालों का सफर – गंगोत्री विधानसभा की विकास गाथा, नेताओं का दांव और ‘सिस्टम’ का नया खेल

 

उत्तरकाशी

उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के साथ ही प्रदेश की राजनीति और विकास के दावों का लेखा-जोखा शुरू हो गया है। 9 नवंबर 2000 को देश के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आए उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

 

 

वर्ष 2000 से 2002 की अंतरिम सरकार (नित्यानंद स्वामी व भगत सिंह कोश्यारी) से लेकर 2007-2012 (भुवन चंद्र खंडूरी व रमेश पोखरियाल ‘निशंक’) और 2017 से 2022 के प्रचंड बहुमत (त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत व पुष्कर सिंह धामी) तक भाजपा ने राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।

2022 के चुनावों में इतिहास रचते हुए पार्टी दोबारा सत्ता में आई और पुष्कर सिंह धामी लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।

 

 

*गंगोत्री विधानसभा- पूर्व बनाम वर्तमान विधायक का रिपोर्ट कार्ड.*

 

 

धार्मिक, पर्यटन और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील गंगोत्री विधानसभा सीट पर हमेशा से सबकी नजरें टिकी रहती हैं। यहाँ के विकास और राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए पूर्व और वर्तमान नेतृत्व के कार्यों का विश्लेषण जरूरी भी है.

 

 

विजयपाल सजवाण का कार्यकाल (पूर्व में कांग्रेस, वर्तमान में भाजपा)

पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण (2007 और 2012 के दौरान सक्रिय) ने हाल के वर्षों में कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा है।

 

सजवाण की मुख्य कार्य बाड़ाहाट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पेयजल योजनाओं व आंतरिक सड़कों का विस्तार, उत्तरकाशी जिला अस्पताल के उन्नयन की पहल और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास व तटबंध निर्माण।

 

 

राजनीतिक प्रभाव मे सजवाण के आने से उत्तरकाशी में भाजपा का कैडर तो मजबूत हुआ है, लेकिन पुराने और निष्ठावान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सामंजस्य बिठाना अब भी एक सांगठनिक चुनौती बना हुआ है।

 

 

वर्तमान विधायक सुरेश चौहान (भाजपा) के कार्यकाल के 2022 में निर्वाचित विधायक सुरेश चौहान के कार्यकाल का केंद्र बिंदु बुनियादी ढांचा और पर्यटन रहा है।

 

 

चौहान के मुख्य कार्य गंगोत्री धाम से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्गों और ‘चारधाम ऑल वेदर रोड’ के चौड़ीकरण व सुरक्षा कार्यों को गति देना।आपदा प्रबंधन व पर्यटन मे संवेदनशील क्षेत्रों में भू-धंसाव रोकने हेतु तटबंध निर्माण, स्थानीय होम-स्टे योजना व साहसिक पर्यटन को बढ़ावा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व डिग्री कॉलेजों में सुविधाओं का विस्तार।

 

 

*2027 मे क्या कहता है जनता का मिजाज*

 

 

*राहत की उम्मीद या असंतोष की लहर?*

 

गंगोत्री सहित पूरे प्रदेश में सरकार के कामकाज को लेकर जनता का मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है.

संतुष्टि के बिंदु चारधाम ऑल वेदर रोड से सुगम हुई यात्रा, गंगोत्री धाम में रिकॉर्ड श्रद्धालुओं का आगमन, सख्त नकल विरोधी कानून और धार्मिक पर्यटन से स्थानीय स्तर पर उत्पन्न हुए रोजगार के अवसर।

 

 

*असंतोष के कारण क्या?*

पर्वतीय क्षेत्रों में स्थायी रोजगार का अभाव, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं के बाद पुनर्वास कार्यों की सुस्त रफ्तार।

 

 

*विश्लेषण, सरकार और सिस्टम—एक ही सिक्के के दो पहलू या ढाल?*

 

 

जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, सड़कें पहली ही बारिश में बह जाती हैं या आपदा राहत में देरी होती है, तो सत्ता के गलियारों से एक ही रटा-रटाया बयान आता हैसिस्टम की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ।

 

*लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार और सिस्टम अलग-अलग हैं?*

 

 

लोकतंत्र में नौकरशाही और प्रशासन (सिस्टम) सरकार की नीतियों और उसकी निगरानी के तहत ही काम करते हैं। जब भी कोई विफलता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो राजनीतिक नेतृत्व जन-आक्रोश से बचने के लिए सिस्टम या निचले अधिकारियों पर ठीकरा फोड़कर खुद को अलग कर लेता है। उत्तराखंड के संदर्भ में, बुनियादी ढांचे का बार-बार ध्वस्त होना केवल प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि राजनीतिक निगरानी की कमी और ढुलमुल नीतियों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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