इनर लाइन परमिट पर डीएम की दोटूक: राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि, ILP प्रोटोकॉल में ढील संभव नहीं
उत्तरकाशी
सीमांत एवं संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों और सामरिक महत्व के इन क्षेत्रों में प्रवेश के लिए तय नियमों व प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की ढील या शिथिलता बरतना संभव नहीं है।
*अचानक बनी योजना से उत्पन्न होता है भ्रम.*
परमिट प्रणाली के संबंध में जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि संशय या भ्रम की स्थिति अक्सर तब उत्पन्न होती है जब लोग पूर्व योजना के बिना यात्रा पर निकलते हैं और मौके पर पहुँचने के बाद नीलांग या जादूंग जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने का निर्णय लेते हैं। डीएम ने कहा कि इनर लाइन परमिट (ILP) एक अत्यंत रणनीतिक प्रणाली है। सुरक्षा के मद्देनजर यह ट्रैक रखना आवश्यक है कि कौन व्यक्ति अधिकृत रूप से सीमांत क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। एसडीएम (SDM) स्तर, एलआईयू (LIU) और गंगोत्री नेशनल पार्क (वन विभाग) स्तर पर परमिट जारी करने के निर्धारित प्रोटोकॉल में वर्तमान में छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
*अब घर बैठे ऑनलाइन मिलेगा परमिट.*
आम नागरिकों और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रक्रिया को आसान बनाया है। अब पर्यटकों को व्यक्तिगत रूप से कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। सत्यापन हेतु आवश्यक दस्तावेज़ प्राप्त होने पर एसडीएम कार्यालय द्वारा ऑनलाइन माध्यम से ही आईएलपी जनरेट कर दिए जाते हैं, जिससे आगंतुकों का समय बचे और उन्हें अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
होटल और ट्रैकिंग एसोसिएशन को निर्देश
जिला प्रशासन ने होटल एसोसिएशन और ट्रैकिंग एसोसिएशन को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने माध्यम से आने वाले पर्यटकों को यात्रा शुरू करने से पहले ही इनर लाइन परमिट के सभी नियमों और प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी दें। प्रशासन ने पर्यटकों और सभी हितधारकों से अपील की है कि वे सीमा सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें ताकि यात्रा का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके।


