उत्तरकाशीउत्तराखंड

लोकसंस्कृति के संरक्षण और प्रसार के लिए हरसंभव किए जाएंगे प्रयास- जिलाधिकारी

 

 

 

लोकसंस्कृति के संरक्षण और प्रसार के लिए हरसंभव किए जाएंगे प्रयास- जिलाधिकारी

उत्तरकाशी

उत्तराखंड का पारंपरिक लोक पर्व ईगास (बूढ़ी दीपावली) जिले में हर्षोल्लास, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। दीपावली के ठीक ग्यारह दिन बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व पर उत्तरकाशी में सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा देखने को मिली। कार्यक्रम में लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर इस त्योहार की रौनक को और बढ़ा दिया।

 

रामलीला मैदान में ईगास पर्व पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण के रूप भैलो खेल रहा। चीड़ की लकड़ी और रस्सी से बनी मशालों को जलाकर ढोल-दमाऊं की पारंपरिक धुनों पर युवाओं और महिलाओं ने लोकगीतों के साथ भैलो नृत्य किया, जिसने सदियों पुरानी लोक परंपरा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।

 

ईगास पर्व की शुरुआत पंजाब सिंध क्षेत्र गंगा घाट पर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य की उपस्थिति में गंगा आरती के साथ हुई। तथा गंगा घाट पर बड़ी संख्या दीप प्रज्ज्वलित किए गए। राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर दीपों से भव्य रूप दिया गया। ईगास पर्व पर महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा पारंपरिक पकवान भी बनाए गए।

 

इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और प्रदेशवासियों को ईगास पर्व की शुभकामनाएं दीं। ईगास पर्व न केवल पुरानी परंपराओं को सहेजने का संदेश देता है, बल्कि सामुदायिक एकजुटता, भाईचारा और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करता है। पूरे जनपद में इगास का उल्लास देर रात तक छाया रहा।

 

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सभी जनपदवासियों को ईगास पर्व की बधाई देते हुए कहा कि ईगास हमारी गौरवशाली संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। आज जब आधुनिकता के दौर में हमारी परंपराएँ कहीं न कहीं पीछे छूटती जा रही हैं, ऐसे में ईगास हमें अपनी जड़ों की याद दिलाता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है।

 

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष भूपेन्द्र चौहान, मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर जोशी सहित जिला स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में लोगों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

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