उत्तरकाशीउत्तराखंड

विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर पी एम राजकीय इंटर कॉलेज मातली में जागरूकता कार्यशाला और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन 

विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर पी एम राजकीय इंटर कॉलेज मातली में जागरूकता कार्यशाला और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन 

उत्तरकाशी (वीरेंद्र नेगी)-  विश्व आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) दिवस  के अवसर पर पी एम राजकीय इंटर कॉलेज, मातली, विकासखंड डुंडा में नौला फाउंडेशन के तत्वाधान में जागरूकता कार्यशाला एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन प्रधानाचार्य संदीप भट्ट और कला अध्यापक संजय शाह के मार्गदर्शन में हुआ जिसमें प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान क्रमशः कुमारी एंजेल कक्षा 11, कुमारी आंचल कक्षा 10 व कुमारी निकिता कक्षा 10 ने प्राप्त किया।

सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. शम्भू नौटियाल व अन्य विषय विशेषज्ञ राजेश जोशी, संजीव कुमार डोभाल ने बताया की हिमालयी क्षेत्र में एक विशाल स्प्रिंग बायोडायवर्सिटी जल सभ्यता मौजूद हैं जिसे पुनर्जीवित करके दुनिया के सामने लाया जा सकता है।  हिमालयी के मिश्रित वर्षा वनों से उत्पन्न परम्परागत जल स्रोतों स्प्रिंग नौलों धारों गधेरो से बनी छोटी छोटी नदियाँ एक जटिल वेब बनाती है जो गंगा बेसिन समेत समस्त जलागम मैं बारहमासी जल आपूर्ति की रीढ़ है ।

मिश्रित जंगल न केवल पानी को संरक्षित करते है बल्कि जल सपंज को भी बनाये रखते है । स्थानीय समुदाय ही इन्हीं वन सम्पदा का असल हितधारक है। समुदाय आधारित गैर लाभकारी संस्था नौला फाउंडेशन, जो पहाड़ पानी परम्परा के मूल आधार हिमालयी परम्परागत जल स्रोत स्प्रिंग्स नौले धारे एवं जैव पारिस्थितिकी तंत्र के सरंक्षण के लिए प्रभावी प्रबंधन, कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करते हैं और सतत विकास लक्ष्य हिमालयी स्प्रिंग्स घोसणा पत्र के दिशा निर्देशों के अनुसार आत्मनिर्भर हिमालय हेतु ग्रामीण सामुदायिक जन सहभागिता के साथ सतत जल सरंक्षण एवं सतत आजीविका सरंक्षण पर गंभीरता से जमीनी स्तर पर कार्यरत है ।

नौला फाउंडेशन को राज्य स्तरीय सतत जल प्रबंधन पर वर्ष 2023 का उत्तराखंड राज्य सरकार (CPGG) द्वारा (UNDP – SDG) एस डी जी अचीवर्स पुरुस्कार से सम्मानित किया गया हैं। हिमालय की आबादी पानी की जरूरतों के लिए प्राकृतिक स्रोतों जैसे गाड़-गदेरे, नौले-धारे आदि पर निर्भर है। स्प्रिंग जैव विविधता के लगातार कम होने से जल संकट गहराता जा रहा है। मौसम को बिगाड़ने और संतुलित करने में इन हिमालयी क्षेत्रों की अहम भूमिका होती है, लेकिन जैसे जैसे स्प्रिंग जैव विविधता कम होती जा रही है, जलस्रोत सिकुड़ते जा रहे हैं।

इस अवसर पर अजय प्रकाश नौटियाल, राजबीर रांगड, प्रकाश विद्वान, बलवीर राणा, देवराज बलूनी, मुकेश नौटियाल, महावीर व्यास सहित व छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

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