विनीता रावत ने कहा कि बैसाखी मेला हमारी पौराणिक संस्कृति है, जिसमें अपने स्थानीय देवी देवताओं को पूरी,चौलाई,अखरोट से बना भोग जिसे “धाणा, बुकाणा” कहा जाता है , उसे अर्पित कर देवी देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है।
उन्होंने कहा कि बैसाखी,खेती के मौसम के आरम्भ को भी दर्शाता है और अन्नदाताओं को उनके मेहनत का सम्मान देता है। इस अवसर पर हम सभी को आपसी सौहार्द और भाईचारे की भावना को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।


