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भक्ति की अनूठी मिसाल: यूपी के बहराइच का 19 वर्षीय रोहित साइकिल से नाप रहा चारधाम की दूरी 

भक्ति की अनूठी मिसाल: यूपी के बहराइच का 19 वर्षीय रोहित साइकिल से नाप रहा चारधाम की दूरी 

उत्तरकाशी:

जहाँ एक ओर चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और लोग हेलीकॉप्टर व लग्जरी वाहनों के जरिए धामों तक पहुँच रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बहराइच से आया एक 19 वर्षीय युवा अपनी अटूट श्रद्धा से सबका ध्यान खींच रहा है। मात्र 19 साल की उम्र में रोहित अपनी साधारण सी साइकिल पर सवार होकर चारों धामों के दर्शन के संकल्प के साथ निकल पड़ा है।

30 दिनों का सफर और अटूट संकल्प

रोहित को घर से निकले 30 दिन से अधिक का समय हो चुका है। अपनी साइकिल के पीछे जरूरी सामान बाँधे, पहाड़ों की दुर्गम चढ़ाइयों को पार करते हुए वह यमुनोत्री धाम के दर्शन कर अब गंगोत्री धाम पहुँच चुका है। रोहित की यह यात्रा केवल शारीरिक बल की नहीं, बल्कि उसकी मानसिक दृढ़ता और भक्ति की परीक्षा है।

श्रद्धा हो तो राह आसान हो जाती है

अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए रोहित कहता है कि”मैंने सोचा था कि प्रभु के दर्शन के लिए थोड़ी कठिनाई तो सहनी ही होगी। आर्थिक तंगी जरूर थी, लेकिन मन में विश्वास था। रास्ते में थकान तो होती है, लेकिन जैसे ही मंदिर के शिखर के दर्शन होते हैं, सारी पीड़ा मिट जाती है। हैरानी की बात यह है कि मेरी श्रद्धा देखकर रास्ते में अनजान लोग भी मेरी मदद कर रहे हैं, जिससे मुझे कभी पैसों की कमी महसूस नहीं हुई।”

भक्ति के आगे साधन बौने

आज के दौर में जहाँ सुविधा संपन्न यात्रा को प्राथमिकता दी जाती है, वहाँ रोहित जैसे नौजवान यह संदेश दे रहे हैं कि भगवान तक पहुँचने के लिए संसाधनों से ज्यादा सच्ची लगन और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। रास्ते में कहीं कोई उसे पानी पिला रहा है, तो कहीं कोई भोजन कराकर उसकी हौसला अफजाई कर रहा है।

रोहित की यह साहसिक यात्रा उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में हार मान लेते हैं। उसकी साइकिल के पहिये न केवल चारधाम की दूरी नाप रहे हैं, बल्कि आधुनिक युग में ‘श्रद्धा और सादगी’ की एक नई इबारत भी लिख रहे हैं।

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