उत्तर की काशी भोले के दरबार में हर हर महादेव के जयकारे गूंज
यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम की ओर जाने वाले हजारों यात्री प्रतिदिन बड़ी संख्या में यहाँ पहुँच रहे हैं, सुबह से ही श्रद्धालुओं मंदिर परिसर में दिखाई दे रही हैं और पूरा क्षेत्र भक्तिमय उल्लास से भर उठा है। धार्मिक परंपरा के अनुसार यमुनोत्री धाम के दर्शन के पश्चात तथा गंगोत्री धाम की यात्रा से पहले बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेना अत्यंत शुभ माना जाता है,
श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-विधि के माध्यम से अपनी यात्रा प्रारंभ कर रहे हैं। मंदिर परिसर में गूंजते ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे वातावरण को और अधिक पवित्र बना रहे हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार देवताओं और ऋषि-मुनियों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने कलियुग में हिमालय को अपना निवास चुना और उत्तरकाशी को “उत्तर की काशी” का गौरव प्राप्त हुआ, जिसे प्राचीन समय में सौम्यकाशी तथा सौम्यवाराणसी के नाम से भी जाना जाता था।
गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के साथ गणेश और माता पार्वती की प्राचीन प्रतिमाएँ भी श्रद्धा का केंद्र बनी हुई हैं। काशीविश्वनाथ मंदिर में जल अर्पण का विशेष महत्व होने के कारण चारधाम यात्रा आरंभ होने के बाद यहां आने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जिससे संपूर्ण नगर आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखाई दे रहा है।
