उत्तराखंडटिहरी गढ़वाल

राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में दो दिवसीय कार्यशाला का समापन 

राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में दो दिवसीय कार्यशाला का समापन 

 

खाड़ी/टिहरी

राजकीय महाविद्यालय खाड़ी में नमामि गंगे की नोडल अधिकारी डॉ मीनाक्षी ने दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जिसमें मंच संचालन डॉ सीमा पांडे ने किया ।

कार्यशाला के दूसरे दिवस पर मुख्य अतिथि जन जागृति भवन संस्थान के अध्यक्ष अरण्य रंजन, जिला पंचायत सदस्य जयकोट वार्ड शीशपाल सजवाण और ग्राम प्रधान भंडार गांव संदीप पैनूली ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 

इस अवसर पर नमामि गंगे की नोडल अधिकारी डॉ मीनाक्षी ने प्रथम दिवस की कार्यशाला की आख्या पढ़ी गईं। अरण्य रंजन ने कूड़े की समस्या और उसके निस्तारण के विषय में तीन महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने खेती के महत्व पर बात की। कहा कि जिन क्षेत्रों में खेती हो रही है वहां जो आसपास के स्रोत और नौले व धाराये हैं वहां स्रोतों में पानी उपलब्ध है। जल है तो जीवन है ।जल, जंगल ,जमीन यह हमारा आधारभूत जीवन प्रणाली का ढांचा है। हम अनाज मशीन से नहीं बना सकते न जल बना सकते हैं न जमीन ।अतः हमें इनके प्रति संवेदनशील होना चाहिए आज हम अपनी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। सड़कों के चौड़ीकरण में वनों ,पहाड़ों का कटाव, भूस्खलन को बढ़ावा देता है इसलिए प्रकृति विकराल रूप धारण करके बड़ी बड़ी आपदाएं ला रही है। आज हमारा मानसून परिवर्तित हो रहा है जलवायु परिवर्तन के कारण हमें इसका खेती में फायदा नहीं मिल पा रहा है। कई बड़े वैज्ञानिक ,भौगोलिक विशेषज्ञ पारिस्थितिक तंत्र के वैज्ञानिक सभी इस पर घोर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। तो यह हमें समझना होगा कि हम अपने परंपरागत बीजों का बचाव करें। अपनी प्रकृति को बचाने के लिए कार्य करें और कूड़े के प्रबंधन के लिए अनावश्यक कूड़ा इकट्ठा ना करें बल्कि अपनी मनोवृति और आदतों में सुधार लाएं ।हमारा सामाजिक आर्थिक परिवेश ढांचा ऐसा है कि जहां पर हमें स्वच्छता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि नियम ज्यादा कारगार नहीं होते हैं जितना व्यक्तिगत संयम कार्य करता है। उन्होंने कूड़े के कुशल प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत संयम की बात करी। वहीं श्री शीशपाल जी ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के जीवन शैली का हवाला देते हुए पूर्णतः मालू के पत्तो और तिमलों के पत्ते पर भोजन खाना परोसने की परिपाटी की उपयोगिता पर चर्चा करी क्योंकि । पेड़ के पतों का प्रयोग बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट है और इस्तेमाल के बाद जानवरों के चारे और खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता था ‌।यह एक बेहतर कूड़े प्रबंधन का विकल्प है। प्रो अरुण कुमार सिंह ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत डस्टबिन के प्रयोग पर जागरूकता अभियान चलाकर आसपास के क्षेत्रों व महाविद्यालय के निकट की हैवल नदी में स्वच्छता अभियान के तहत स्वच्छता अभियान करने का संकल्प लिया‌ और एनएसएस व नमामि गंगे के स्वयं सेवकों व समस्त छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित किया।इस अवसर पर विपिन बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र व आयुषी नेगी बी.ए द्वितीय सेमेस्टर द्वारा पीपीटी प्रेजेंटेशन किया।सभी आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अंत में डाॅ ईरा सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम समापन की घोषणा की।

 

इस अवसर पर प्रो निरंजना शर्मा,डा शन्नोवर,डॉ सीमा पांडे, डॉ मीना, डॉ संगीता, योगाचार्य श्री रघुवीर चोपड़ा,आशीष,मनीषा,दीपक पंकज, हितेश व समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।

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