उत्तरकाशी में आस्था का संगम: वरुणावत पर्वत की ऐतिहासिक वारुणी यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू
बड़ेथी से प्रारंभ होने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु सबसे पहले वरुणा और गंगा के संगम में स्नान करते हैं, जिसके बाद वे बसुंगा, साल्ड, ज्ञाणजा, शिखरेश्वर, संग्राली और पाटा होते हुए गंगोरी तक पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु वरुणेश्वर, अखंडेश्वर, जगतनाथ मंदिर, अष्टभुजा दुर्गा, ज्ञानेश्वर, व्यास कुंड, वरुणावत शिखर स्थित शिखरेश्वर, विमलेश्वर महादेव, संग्राली के कंडार देवता तथा पाटा के नर्वदेश्वर मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। गंगोरी पहुंचकर असीगंगा और भागीरथी के संगम में स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु उत्तरकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर यात्रा का विधिवत समापन करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि इस यात्रा के संपादन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। प्राचीन काल में यह यात्रा तीन दिन तक चलने वाली कठिन और विस्तृत यात्रा थी, जिसमें मुख्य रूप से साधु-संत भाग लेते थे, किंतु वर्तमान में इसे सरल बनाकर एक दिन में संपन्न किया जाता है, जिससे अधिकाधिक श्रद्धालु इसमें सहभागिता कर पा रहे हैं।
