उत्तरकाशी: पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने दिया ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहें’ का संदेश
उत्तरकाशी: पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने दिया ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहें’ का संदेश
उत्तरकाशी
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर प्लांटिका फाउंडेशन एवं मंजिरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी द्वारा उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से “सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहें” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, सतत कृषि, प्लास्टिक प्रदूषण तथा स्वच्छ जल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी डैम-द्वितीय साक्षी रावत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने घटती बर्फबारी, वन्यजीवों के बदलते व्यवहार तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया।
उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता अमित पोखरियाल ने बढ़ती जनसंख्या, सीमित प्राकृतिक संसाधनों तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण, कृषि, आजीविका और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
मंजिरा देवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. भगवान नौटियाल ने पर्वतीय कृषि की वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा करते हुए वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।
संगोष्ठी के दौरान शोधार्थियों द्वारा पर्यावरण विषयक पोस्टर प्रस्तुतियां दी गईं। इसके अतिरिक्त ग्राम हिताणु में “सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना कहें” विषय पर वृक्षारोपण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रोफेसर डॉ. अनूप बड़ोनी ने जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि, स्वच्छ जल तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता पर बल देते हुए प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। अंत में आयोजन सचिव डॉ. पल्लवी चौहान ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
