दो दिवसीय ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल का आज दीप प्रज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ
फेयर फील्ड बाय मैरिएट में आयोजित हुए इस भव्य फेस्टिवल का भारतीय रिजर्व बैंक झारखंड के निदेशक प्रेम रंजन अनिमेष ने किया उद्घाटन
देहरादून
दो दिवसीय ‘द लिटरेरी टेबल’ लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित फेयर फील्ड बाय मैरिएट के सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ भव्य शुभारंभ हुआ, जिसका उद्घाटन फेस्टिवल के मुख्य अतिथि भारतीय रिजर्व बैंक झारखंड के निदेशक श्री प्रेम रंजन अनिमेष द्वारा किया गया I
फेस्टिवल के इस शुभारंभ अवसर पर मुख्य बात यह रही कि उसमें भारत के मशहूर लेखक बाची करकारिया तथा अन्य शाही मेहमानों से रूबरू हुए। फेस्टिवल की निदेशक डॉ आलोका दास गुप्ता नियोगी ने सर्वप्रथम साहित्य और कला पर प्रकाश डाला तथा कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी अतिथियों का स्वागत किया I तत्पश्चात क्रमवार आठ सेशन प्रस्तुत किए गए I दूसरे सेशन में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने साईबर अपराधों, अन्य अपराधों एवं पीड़ितों के साथ हो रहे पुलिस के रवैए पर बेबाकी से अपना पक्ष रखते हुए सभी सवालों से आयोजकों व ऑडियंस को संतुष्ट किया I आज के सभी सेशन भिन्न भिन्न दिलचस्प एवं जागरूकता को लेकर रहे I तीसरे सेशन में जूही खन्ना, एस समृद्धि गुलाटी, अजिताभा बोस ने प्रतिभाग किया। जबकि चौथे सेशन ‘स्टोरीज ऑफ मेमोरी एण्ड साइलेंस’ में मोना वर्मा, डॉ. आलोका दास गुप्ता नियोगी, जया श्री बैनर्जी तथा गुंजन कावतरा ब्लूजा द्वारा चर्चा की गई I चर्चा में वर्तमान समय में चली आ रही सामुदायिक व सांप्रदायिकता से जुड़े मुद्दों, हिन्दू और मुस्लिम के रवैयों को लेकर चले आ रहे माहौल पर वक्तव्य रखे गए I इस लिटरेचर और आर्ट्स फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य लेखकों को बढ़ावा रहा I इस अवसर पर मौजूद रहे देश के अनेक सम्मानित साहित्यिक और बौद्धिक हस्तियों के साथ भिन्न भिन्न मुद्दों पर चर्चा करना रहा I
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्य अतिथि भारतीय रिजर्व बैंक झारखंड के निदेशक प्रेम रंजन अमिनेश ने कहा कि साहित्य वह बहुत ही सॉफ्ट शब्द है जो कि सभी को साथ लेकर तथा आपस में जोड़कर चलता है I उन्होंने कहा कि साहित्य और कला ने सदैव ही समाज में दूरी उत्पन्न करने वाली खाई को दूर करने व मिटाने का काम किया है, साथ ही वासुदेव कुटुंबकम् कल्चर को भी आगे बढ़ाने का काम किया है I संस्कृत के महत्व पर भी मुख्य अतिथि श्री प्रेम रंजन अमिनेश ने प्रकाश डाला और कहा कि संस्कृत का भी साहित्य में बड़ा महत्व है I उन्होंने हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला का स्मरण भी किया और कहा कि साहित्य में मधुरता का भरपूर समावेश है I फेस्टिवल में विशिष्ठ अतिथि दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ गौरव लूथरा ने आयोजकों को भव्य इस कार्यक्रम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि साहित्य में स्वयं ही वह गहरी कला है जो कि सभी को एकता के सूत्र में पिरोए रखती है I
पांचवां महत्वपूर्ण सेशन का टॉपिक ‘इन हॉट ब्लड, कोल्ड प्रिंट’ रहा, जिसमें बची करकारिया एवं डॉ. रूबी गुप्ता की जोरदार भूमिका रही I बची करकारिया ने कहा कि सीपी कृष्णन नायर द्वारा लिखे गए लेख में हमें बहुत ही महत्वपूर्ण राइटअप मिला है I सेशन के टॉपिक पर बची करकारिया ने कहा कि अनेक देशों के बीच हुए युद्ध ने कई मूवमैंट के सीन अथवा दृश्य समाज को दिखाए हैं और ऐसे युद्धों ने व्यापार प्रभावित करने का काम किया है जो चिंता का विषय रहे हैं I फेस्टिवल में बची करकारिया, लेखक, टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कॉलमिस्ट, पूर्व डीजीपी अशोक कुमार, ईपीएस- लेखक, डॉ. शालिनी मलिक, जाने-माने लेखक और पब्लिशर,तरुण महर्षि– बेस्टसेलिंग लेखक, समृद्धि गुलाटी– जम्मू से बेस्टसेलिंग लेखक और साइकोलॉजिस्ट, बेस्टसेलिंग लेखक, डॉ. आलोक दासगुप्ता नियोगी– अवॉर्ड जीतने वाली लेखिका और फ्रीलांस राइटर जैसी बड़ी हस्तियों को सुनने का आज प्रत्यक्ष रूप में सुनहरा अवसर सभी को प्राप्त हुआ I
