उत्तराखंडनैनबाग

नागटिब्बा बेस कैंप में समर कैंप: नारायण सिंह राणा के निर्देशन में प्रकृति के बीच सीखेंगे छात्र

नागटिब्बा बेस कैंप में समर कैंप: नारायण सिंह राणा के निर्देशन में प्रकृति के बीच सीखेंगे छात्र

नैनबाग (शिवांश कुंवर): समर कैंप नागटिब्बा बेस कैंप में आयोजित किया जाएगा, जो नैनबाग से लगभग 30 किलोमीटर आगे प्राकृतिक सौंदर्य एवं शांत वातावरण के बीच स्थित है। इस कार्यक्रम का संचालन कैंप के चेयरमैन एवं डायरेक्टर द्रोणाचार्य पुरस्कार,पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा के माध्यम से किया जा रहा है। उनके निर्देशन में विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहकर सीखने एवं अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आज के आधुनिक शिक्षा दौर में केवल पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि विद्यार्थियों के मानसिक,शारीरिक एवं सामाजिक विकास के लिए व्यावहारिक गतिविधियाँ भी अत्यंत आवश्यक हो गई हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों में समर कैंप (ग्रीष्मकालीन शिविर) आयोजित करने की पहल को एक महत्वपूर्ण है।

समर कैंप विद्यार्थियों को कक्षा के सीमित वातावरण से बाहर निकलकर नई चीज़ें सीखने, अपनी प्रतिभा को पहचानने तथा आत्मविश्वास बढ़ाने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे शिविरों के माध्यम से छात्र-छात्राएँ रचनात्मक गतिविधियों, टीमवर्क एवं नेतृत्व क्षमता का विकास कर पाते हैं।

समर कैंप में साहसिक एवं आउटडोर शिक्षण गतिविधियाँ, कला एवं शिल्प कार्यशालाएँ, प्रकृति एवं पर्यावरण जागरूकता सत्र, संगीत, नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, जैविक खेती, बागवानी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसी उपयोगी गतिविधिया शामिल है। इसके अतिरिक्त खेलकूद एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियाँ भी विद्यार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक होंगी।

 

नारायण सिँह राणा का कहना है ऐसे शिविर विद्यार्थियों में संवाद कौशल, अनुशासन, सहयोग की भावना तथा सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव नई सोच और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

समर कैंप का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अवकाश अवधि का रचनात्मक एवं उपयोगी उपयोग सिखाना है, ताकि वे मनोरंजन के साथ-साथ सीखने की प्रक्रिया से भी जुड़े रहें। इससे बच्चों में आत्मनिर्भरता एवं व्यावहारिक जीवन कौशल का विकास होता है, जो भविष्य में उनके लिए लाभकारी सिद्ध होता है।

विद्यालय प्रशासन एवं अभिभावकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस प्रकार की शैक्षणिक एवं रचनात्मक पहल को प्रोत्साहित करें, जिससे छात्र-छात्राओं को सीखने, रचनात्मकता और आनंद का संतुलित वातावरण मिल सके तथा उनका समग्र व्यक्तित्व विकास हो सके।

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