नैनबाग में ओलावृष्टि से भारी नुकसान, किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी
नैनबाग में ओलावृष्टि से भारी नुकसान, किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी
नैनबाग (अमित नौटियाल/शिवांश कुंवर)- नैनबाग क्षेत्र में हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अचानक हुई इस प्राकृतिक आपदा के कारण खेतों में खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, वहीं फलदार वृक्षों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। खासकर सब्जियों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में खेतों का स्वरूप बदल गया। मौसमी सब्जियां पूरी तरह नष्ट हो गईं। इसके अलावा सेब,आड़ू,खुमानी और पुलम जैसे फलदार पेड़ों को भी काफी क्षति पहुंची है, जिससे आने वाले समय में फल उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरे साल कड़ी मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन इस आपदा ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।

काश्तकार संदीप चौहान ने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि किसान पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने उसकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
भाजपा युवा नेता राजेश सजवाण का कहना है कि हाल ही में हुई ओलावृष्टि ने क्षेत्र के किसानों को गहरा आघात पहुंचाया है। खेतों में खड़ी फसलें, सब्जियां और फलदार पेड़ बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत कुछ ही मिनटों में नष्ट हो गई।
किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि प्रभावित किसानों का तत्काल सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे किसानों की आवाज को मजबूती से उठाते रहेंगे और हर संभव सहायता के लिए प्रयासरत रहेंगे।
एसडीएम नीलू चावला ने कहा है कि क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि के कारण फसलों, फलदार पेड़ों एवं सब्जियों को हुए नुकसान का संज्ञान लिया गया है। उन्होंने बताया कि मौसम की स्थिति सामान्य होते ही संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के उपरांत वास्तविक नुकसान का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रभावित किसानों को शासन की निर्धारित नीति के अनुसार सहायता प्रदान की जा सके।
