माली की नौकरी करने वाली मां के बेटे ने UPSC में मारी बाजी, भारत सरकार में बने वैज्ञानिक अधिकारी
माली की नौकरी करने वाली मां के बेटे ने UPSC में मारी बाजी, भारत सरकार में बने वैज्ञानिक अधिकारी
चम्पावत में रहकर की पढ़ाई, 22 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित; संघर्ष, मेहनत और मां-नाना के सहयोग से हासिल की बड़ी सफलता
चंपावत
चम्पावत के लिए गर्व की बात है कि मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के डुंगरी गांव निवासी और वर्तमान में चम्पावत में रह रहे अनिल कोठारी का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्यम से भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग में वैज्ञानिक अधिकारी (Scientific Officer) पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से चम्पावत सहित पूरे कुमाऊं क्षेत्र में खुशी की लहर है।
अनिल की सफलता संघर्ष, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल है। बताया जाता है कि जन्म के महज 22 दिन बाद ही उनके नाना ईश्वरी दत्त पांडेय उन्हें अपने साथ सल्टा गांव (पोस्ट बगोटी), चम्पावत ले आए थे। यहीं उनका पालन-पोषण हुआ। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक विद्यालय बगोटी से तथा इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई वीवीएमआईसी चम्पावत से पूरी की।
इसके बाद उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और एमएससी (केमिस्ट्री) में गोल्ड मेडल हासिल किया। वे CSIR-IIP देहरादून में शोध छात्र भी रहे हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनके 22 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें DST INSPIRE स्कॉलरशिप एवं फेलोशिप भी मिली, जिसने उनके शोध कार्य को नई दिशा दी।
पिता का साया बचपन में उठा, मां ने नहीं टूटने दिया हौसला
अनिल के पिता स्वर्गीय त्रिलोचन कोठारी का निधन तब हो गया था, जब वे छोटे थे। इसके बाद उनकी मां ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उनकी पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। वर्तमान में उनकी मां नगर पालिका चम्पावत में आउटसोर्स के माध्यम से चतुर्थ श्रेणी माली के पद पर कार्यरत हैं। अनिल ने भी पढ़ाई के दौरान बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा जारी रखी।
अनिल अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, नाना और उन सभी लोगों को देते हैं जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनका साथ दिया।
शोध पर्यवेक्षक ने बताया प्रेरणास्रोत
अनिल के शोध पर्यवेक्षक डॉ. राजाराम बाल ने कहा कि अनिल शुरू से ही प्रतिभाशाली और मेहनती शोधार्थी रहे हैं। उनका चयन युवाओं के लिए प्रेरणा है और यह उनकी लगन का परिणाम है।
अनिल के मामा हरीश पांडेय, जो वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम में काउंसलर के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने कहा,
“अनिल ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। उनकी सफलता केवल हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे चम्पावत और उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा है। हमें विश्वास है कि वे अपने कार्य से देश का नाम और ऊंचा करेंगे। यह सफलता उनकी मां के त्याग, नाना के संस्कार और अनिल की अथक मेहनत का परिणाम है।”
अनिल की उपलब्धि पर स्थानीय लोगों, शिक्षकों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। लोगों का कहना है कि उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।
