उत्तरकाशीउत्तराखंड

डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल की पुस्तक ‘प्रकृति से प्रौद्योगिकी तक’ का विमोचन

 

डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल की पुस्तक ‘प्रकृति से प्रौद्योगिकी तक’ का विमोचन

 

उत्तरकाशी

वीर माधो सिंह भंडारी तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर स्थित राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बौन) में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान विज्ञान शिक्षक एवं जाने-माने विज्ञान लेखक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल की नवीन पुस्तक ‘प्रकृति से प्रौद्योगिकी तक: बदलते युग का विज्ञान’ का विधि-विधान से विमोचन किया गया।

​ मुख्य व विशिष्ट अतिथियों ने किया लोकार्पण

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक एच. एस. भदौरिया तथा विशिष्ट अतिथि ऋषिराम शिक्षण संस्थान के प्रबंधक डॉ. अरविंद जगूड़ी ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे विज्ञान, पर्यावरण और आधुनिक तकनीक के अंतरसंबंधों को सरल भाषा में समझाने वाला एक अनूठा व महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

​ क्या है पुस्तक की खासियत?

​लेखक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने पुस्तक के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें समसामयिक और पारंपरिक दोनों विषयों का बेहतरीन समावेश किया गया है। पुस्तक में मुख्य रूप से निम्न विषयों को समेटा गया है:
​प्रकृति और पर्यावरण: जैव विविधता, गंगा का वैज्ञानिक पक्ष, जैविक खेती और बीज संरक्षण।

​आधुनिक तकनीक: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, एसटीईएम (STEM) शिक्षा और भविष्य की तकनीकें।

​”इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य पाठकों, विशेषकर युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) विकसित करना और प्रकृति व प्रौद्योगिकी के बीच एक संतुलित संबंध की आवश्यकता को समझाना है।”
— डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल, लेखक
​बदलते युग में बेहद उपयोगी है यह पुस्तक: भदौरिया
​मुख्य अतिथि एच. एस. भदौरिया ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान और तकनीक बेहद तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे दौर में यह पुस्तक विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम पाठकों के लिए मार्गदर्शक और अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

​वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. अरविंद जगूड़ी ने कहा कि यह पुस्तक विज्ञान को शुष्क न रखकर उसे समाज और पर्यावरण से जोड़ती है, जिससे पाठकों में एक नई सोच विकसित होगी।
​विज्ञान प्रेमियों ने दी

 

​विमोचन के इस अवसर पर डॉ. राजेश जोशी, संजय जगूड़ी और संजीव डोभाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए और पुस्तक की प्रासंगिकता की सराहना की। कार्यक्रम में भारी संख्या में मौजूद स्थानीय शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और विज्ञान प्रेमियों ने पुस्तक का स्वागत करते हुए लेखक डॉ. नौटियाल को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!