जादूँग की तर्ज पर नेलांग को भी दोबारा बसाने की उठी मांग
ग्रामीणों की इस मांग के पीछे की मुख्य वजह है कि जिस प्रकार शासन प्रशासन जादूँग को फिर से बसाने के लिए प्रयास कर रहा है उसी तरह नेलांग गाँव को भी जल्द से जल्द बसाया जाय. जिससे नेलांग गाँव के ग्रामीण वह फिर से बसे. और रोजगार का भी साधन मिल सके.
जादूँग की तर्ज पर पुनर्वास
उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में जादूँग गाँव को ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत फिर से बसाने और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम शुरू किया है। इसी को देखते हुए नेलांग के ग्रामीणों की भी मांग है कि उनके गाँव नेलांग को भी इसी तर्ज पर पूरी तरह पुनर्जीवित किया जाए.उजाड़ हो चुके घरों और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण हो ताकि वे वापस वहां रह सकें।
इनर लाइन परमिट (ILP) हटाने की मांग
सुरक्षा कारणों से यह क्षेत्र इनर लाइन के भीतर आता है, जिससे यहाँ आवाजाही बेहद प्रतिबंधित है। ग्रामीणों का कहना है कि अनुमति का झंझट खत्म हो.अपने ही पैतृक गाँव और आराध्य देव के दर्शन के लिए उन्हें हर साल प्रशासन से अनुमति (परमिट) लेनी पड़ती है, जिससे उन्हें काफी मानसिक और व्यावहारिक परेशानी होती है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।
पर्यटन को बढ़ावा भी मिले.यदि इनर लाइन प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो देश-दुनिया के पर्यटक इस खूबसूरत घाटी को देख सकेंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
ग्रामीणों का धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव.ग्रामीणों का अपने पैतृक गाँव से गहरा आध्यात्मिक नाता है। यहाँ के स्थानीय लोग हर साल अपने कुलदेवता (रिंगाली देवी और लाल देवता) की पूजा-अर्चना करने के लिए विशेष अनुमति लेकर नेलांग घाटी जाते हैं।उनकी मांग है कि उन्हें बिना किसी प्रशासनिक रोक-टोक के अपने धार्मिक अनुष्ठान करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
इस क्षेत्र मे शासन प्रशासन कि वस्तुस्थिति और चुनौतियाँ भी देखने को मिलती है.जहाँ एक तरफ ग्रामीणों की अपनी मातृभूमि और संस्कृति के प्रति यह मांग पूरी तरह जायज है, वहीं दूसरी तरफ यह क्षेत्र चीन सीमा (LAC) के बेहद करीब होने के कारण सामरिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है। सरकार वर्तमान में ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत सीमावर्ती गाँवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचा रही है, लेकिन सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
