उत्तरकाशी

बजट खपाने का जरिया बना डुंडा का सुलभ शौचालय,  न पानी की सुविधा, न स्वच्छता पर ध्यान 

बजट खपाने का जरिया बना डुंडा का सुलभ शौचालय,  न पानी की सुविधा, न स्वच्छता पर ध्यान 

सभी विभागों के शौचालय चकाचक. सार्वजनिक शौचालय की स्थिति खराब

उत्तरकाशी(वीरेंद्र सिंह नेगी)-

सरकारें एक तरफ जहां ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत कई अभियान चला रही है. वहीं दूसरी ओर धरातल पर सरकारी मशीनरी की लापरवाही के चलते योजनाएं दम तोड़ती दिख रही है। इसका ताजा उदाहरण डुंडा विकासखंड मुख्यालय के समीप बना सुलभ शौचालय है। वर्तमान में यह शौचालय जनसुविधा के बजाय बुरी स्थति मे देखने को मिल रहा है।

 

 


​ गंदगी का अंबार और टूटी पानी की टंकी

​स्थानीय ग्रामीणों और ब्लॉक व् तहसील आने वाले लोगों का कहना है कि शौचालय की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है. चारों तरफ फैली गंदगी के कारण यहां पैर रखना भी दूभर है.सबसे बदतर स्थिति पानी की व्यवस्था की है.शौचालय के ऊपर रखी पानी की टंकी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसके कारण उसमें पानी इस्तेमाल करना नामुमकिन है.बिना पानी और सफाई के यह शौचालय पूरी तरह से शोपीस बना हुआ है।

अपनी समस्याओं को लेकर ब्लॉक और तहसील पहुंच रहे 100 गांवों के लोग  

​गौरतलब है कि डुंडा ब्लॉक मुख्यालय में रोजमर्रा के सरकारी और निजी कार्यों के लिए दूर-दराज के 100 से अधिक गांवों से सैकड़ों ग्रामीण आते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले फरियादी शामिल हैं। शौचालय की इस दुर्दशा के कारण सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और युवतियों को उठानी पड़ रही है। उन्हें शौच और पानी की असुविधा के कारण भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

​ क्या सिर्फ बजट खपाने के लिए बना शौचालय?

स्थानीय लोगों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इस सुलभ शौचालय का निर्माण जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सरकारी बजट को ठिकाने लगाने (किनारे लगाने) के उद्देश्य से किया गया था। यदि ऐसा नहीं होता, तो निर्माण के बाद इसके रखरखाव और पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?

​ आस-पास के दुकानदार और राहगीर भी त्रस्त 

​शौचालय में नियमित सफाई न होने और पानी की अनुपलब्धता के कारण वहां से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने आस-पास के दुकानदारों, स्थानीय निवासियों और वहां से गुजरने वाले राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। इससे क्षेत्र में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी बन सकता है.


 

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