सफलता की कहानी: “पोल्ट्री फार्म से आत्मनिर्भरता की उड़ान: चैतादेवी की प्रेरणादायक कहानी
सफलता की कहानी: “पोल्ट्री फार्म से आत्मनिर्भरता की उड़ान: चैतादेवी की प्रेरणादायक कहानी
टिहरी
टिहरी गढ़वाल जनपद के विकासखंड भिलंगना के थाती गाँव की निवासी चैतादेवी आज ग्रामीण महिला उद्यमिता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। वह भैरवनाथ स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं तथा महादेव आजीविका महिला ग्राम संगठन और संगम स्वायत्त सहकारी, डांगी CLF से जुड़ी हुई हैं।
पहले परिवार की आय के सीमित साधनों के कारण आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं। लेकिन आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छा, निरंतर मेहनत और REAP परियोजना के सहयोग ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
REAP परियोजना से मिली नई दिशा:-
स्वरोजगार की शुरुआत के लिए चैतादेवी को REAP परियोजना के तहत ₹22,500 की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त उन्होंने बैंक से ₹37,500 का ऋण लिया तथा ₹15,000 अपनी बचत से निवेश किए। इस प्रकार कुल ₹75,000 की लागत से उन्होंने अपने गाँव में मदर यूनिट पोल्ट्री फार्म की स्थापना की।
मेहनत से मिली सफलता:-
आज उनके पोल्ट्री फार्म में लगभग 100 मुर्गियाँ हैं। आधुनिक तरीके से देखभाल और नियमित प्रबंधन के कारण उनका फार्म अच्छी तरह संचालित हो रहा है।
फार्म से उन्हें तीन प्रमुख स्रोतों से आय प्राप्त होती है:- अंडा उत्पादन: लगभग 400 अंडे प्रति सप्ताह का उत्पादन होता है। ₹8 प्रति अंडे की दर से उन्हें लगभग ₹12,800 प्रतिमाह की आय प्राप्त होती है।
चूज़ों की बिक्री: प्रतिमाह लगभग 25 चूज़ों की बिक्री से ₹1,000 की अतिरिक्त आय होती है।
मुर्गियों की बिक्री: स्थानीय बाजार एवं मीट विक्रेताओं को प्रतिमाह लगभग 50 मुर्गियाँ बेचकर उन्हें लगभग ₹10,000 की आय प्राप्त होती है।
आर्थिक बदलाव की नई शुरुआत:-
पोल्ट्री फार्म से होने वाली नियमित आय ने चैतादेवी के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। अब वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर रही हैं तथा भविष्य के लिए बचत भी कर पा रही हैं। पशुपालन के प्रति उनकी लगन और व्यवस्थित प्रबंधन ने उनके उद्यम को सफल बनाया है।
दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा:-
चैतादेवी की सफलता से उनके गाँव और आसपास की कई महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा रही हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और मेहनत का साथ हो, तो ग्रामीण महिलाएँ भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ डी के शर्मा द्वारा अवगत कराया गया कि REAP एवं पशुपालन विभाग द्वारा पोल्ट्री फार्म खोले जाने से जहाँ एक ओर ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके स्वयं एवं परिवार के लिए अंडे व मांस के द्वारा कम लागत में प्रोटीनयुक्त आहार भी प्राप्त हो रहा है जो उनके तथा उनके परिवार के उचित पोषण तथा स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। पशुपालन विभाग द्वारा भी जनपद में बैक यार्ड पोल्ट्री, कुक्कुट वैली तथा ब्रायलर फार्म योजना का संचालन किया जा रहा है जिसका लाभ ग्रामीणों द्वारा उठाया जा सकता है, साथ ही सभी कुक्कुट पालकों के पक्षियों को चिकित्सा सुविधा औषधियां एवं प्रशिक्षण निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। जनपद में कुक्कुट पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं यह आजीविका के लिए अति उत्तम व्यवसाय है तथा चैता देवी जैसे कुक्कुट पालक अन्य ग्रामीण किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, उन्होंने समस्त पशुपालकों से निवेदन किया कि वो इस क्षेत्र में आगे आये और बढ़ चढ़ कर इसमें प्रतिभाग करे।
चैतादेवी की कहानी केवल एक सफल पोल्ट्री फार्म की कहानी नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका विकास का प्रेरणादायक उदाहरण है। REAP परियोजना के सहयोग और अपने अथक परिश्रम से उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी सफलता का मार्ग प्रशस्त किया।
