जीआईसी मुस्टिकसौड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनदेखी का मामला
जीआईसी मुस्टिकसौड़ में सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनदेखी का मामला
87 लाख खर्च, फिर भी वीरान पड़ा शिक्षक आवास, उपयोग से पहले झाड़ियों में छिपा भवन
उत्तरकाशी
उत्तरकाशी के राजकीय इंटर कॉलेज मुस्टिकसौड़ से सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। वर्ष 2023 में ‘बॉर्डर डेवलपमेंट एरिया योजना’ के तहत लगभग 87 लाख रुपये की लागत से बना शिक्षकों का आवासीय भवन आज उपेक्षा की भेंट चढ़ चुका है। उपयोग में आने से पहले ही यह भवन झाड़ियों में छिपकर बदहाली के आंसू बहा रहा है।

सीमांत क्षेत्र के विकास और शिक्षकों की सुविधा के लिए जिस भवन पर सरकार ने ₹87 लाख खर्च किए, वह आज खंडहर में तब्दील हो रहा है। निर्माण निगम चंबा द्वारा वर्ष 2023 में तैयार किया गया यह आवासीय परिसर सुरक्षा और देखरेख के अभाव में असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।
बदहाली की जमीनी हकीकत:
भवन के चारों ओर उगी घनी घास और झाड़ियों के कारण यह दूर से किसी वीरान जगह की तरह दिखता है। कमरों के दरवाजे तोड़ दिए गए हैं, खिड़कियों के कांच टूट चुके हैं और पंखों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया है।
उचित रखरखाव न होने से कई कमरों में लोगों द्वारा गंदगी फैलाई गई है, जिससे पूरा परिसर बदबूदार और जर्जर स्थिति में पहुंच गया है।
जनता का आक्रोश और उठते सवाल
क्षेत्र पंचायत सदस्य शंकर गुसाईं और मस्ताड़ी के पूर्व प्रधान सत्यनारायण नौटियाल ने इस स्थिति पर गहरा रोष जताया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण के बाद समय पर भवन का हस्तांतरण (हैंडओवर) और उपयोग शुरू कर दिया जाता, तो जनता की कमाई से बना यह भवन इस हालत में न पहुंचता।
प्रशासन से प्रश्न?
जब भवन का उपयोग ही नहीं करना था, तो 87 लाख रुपये की धनराशि क्यों खर्च की गई?
निर्माण पूरा होने के बाद इसकी सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग की थी?
3 साल तक इस संपत्ति को लावारिस छोड़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल परिसर की झाड़ियां साफ करना काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। निर्माण की गुणवत्ता, भुगतान और हैंडओवर प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
